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सिल्वर स्टेट में डॉक्टर को लूटने के लिए पुराने सिक्योरिटी गार्ड ने रची थी साजिश, एक आरोपी को दबोचा, मास्टरमाइंड सहित दो फरार

सिल्वर स्टेट में डॉक्टर को लूटने के लिए पुराने सिक्योरिटी गार्ड ने रची थी साजिश, एक आरोपी को दबोचा, मास्टरमाइंड सहित दो फरार

 

ग्वालियर। शहर की पाश हाउसिंग सोसायटी सिल्वर एस्टेट में हुए गोलीकांड का राज आखिर खुल गया। हाउसिंग सोसायटी का पुराना सिक्योरिटी गार्ड ही मास्टरमाइंड निकला है, हालांकि वह अभी तक पकड़ा नहीं जा सका है। उसके फुफेरे भाई को पुलिस ने दबोच लिया है। इन लोगों ने लूट के उद्देश्य से ही डाक्टर के फ्लैट को टारगेट किया था। सिक्योरिटी गार्ड को पता था कि डाक्टर और उनकी पत्नी क्लीनिक पर जाते हैं, इसलिए उसने इनके फ्लैट को टारगेट किया। इन लोगों ने कुछ और भी परिवारों को निशाना बनाने की प्लानिंग की थी, जहां बच्चे अकेले रहते हैं। लेकिन पहली वारदात में ही यह फेल हो गए। तीनों आपस में रिश्तेदार हैं।

सिटी सेंटर स्थित सिल्वर एस्टेट हाउसिंग सोसायटी में आठवीं मंजिल पर फ्लैट नंबर 803 में रहने वाले डा.राजेश गुप्ता अपने परिवार के साथ फ्लैट के अंदर थे। 1 नवंबर को रात करीब 10 बजे उनके फ्लैट में घुसने की दो बदमाशों ने कोशिश की, जब उन्होंने रोका तो कट्टे से फायर कर दिया। इसमें गोली डा.गुप्ता के हाथ में लगी। सीएसपी यूनिवर्सिटी रत्नेश सिंह तोमर और उनकी टीम लगातार पड़ताल में लगी हुई थी। एक महीने से अधिक समय तक पड़ताल के बाद एक सुराग मिला और पुलिस ने कुलदीप परमार निवासी मुरैना को दबोच लिया। उससे जब पूछताछ की गई तो उसने बताया कि उसके ममेरे भाई विक्रम सिकरवार और सोनू के साथ मिलकर लूट करने के लिए यहां पहुंचे थे। विक्रम यहां करीब डेढ़ साल पहले सिक्योरिटी गार्ड था, उसे पता था कि किस फ्लैट में कौन रहता था। डा.गुप्ता के फ्लैट में इसलिए घुसने की कोशिश की थी क्योंकि वह और उनकी पत्नी क्लीनिक पर रहते हैं। इसलिए यहां लूट के उद्देश्य से गए थे। लेकिन डा.गुप्ता ने उन्हें अंदर नहीं जाने दिया और गोली चलाकर वह भाग गए। पुलिस विक्रम और उसके भाई की तलाश में लग गई है। सीएसपी यूनिवर्सिटी रत्नेश सिंह तोमर ने बताया कि जल्द ही दोनों फरार आरोपितों को पकड़ लिया जाएगा।सीसीटीवी कैमरों से पहचान नहीं हुई तो 50 हजार मोबाइल नंबर की एक महीने तक पड़ताल, दस संदिग्ध नंबर मिले, इनसे मिला सुराग: सीएसपी तोमर ने बताया कि सीसीटीवी कैमरों से होटल गोल्डन पैलेस के बाद के फुटेज नहीं मिले थे, जो फुटेज थे उनसे आरोपितों की पहचान नहीं हो पाई। इसके बाद पीएसटीएन यानि पब्लिक स्विच्ड टेलीफोन नेटवर्क लिया, जिससे उस क्षेत्र में संचालित मोबाइल नंबरों की जानकारी सामने आ गई। पीएसटीएन में करीब 50 हजार नंबर मिले। आरोपित फोन पर बात कर रहे थे, इसमें दस नंबर संदिग्ध मिले जो यहां रहते नहीं थे, यहां से इनका लिंक नहीं था। यहां से सुराग मिला और कुलदीप परमार को दबोच लिया गया।

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