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नहीं रहे अलग अलग शैली के पत्रकार कमाल खान। आखिर क्यों सबसे अलग थे कमाल

नहीं रहे अलग अलग शैली के पत्रकार कमाल खान। आखिर क्यों सबसे अलग थे कमाल

 

एनडीटीवी के शीर्षास्थ पत्रकारों में शुमार कमाल खान का आज सुबह लखनऊ स्थित उनके निवास पर असामयिक निधन हो गया। कुछ देर पहले ही उन्होंने यूपी के दलबदल पर अपनी एक स्टोरी फाइल की- जहां मिलेगी मेवा,वहां करेंगे सेवा । कुछ देर बाद उन्हें हृदयघात हुआ। परिजन उन्हें लेकर अस्पताल की तरफ दौड़े लेकिन वहां से बेजान लौटे। आज के सियासी कुहासे में जब पत्रकारिता खेमेवाजी की शिकार हो तब भी निष्पक्ष पत्रकारिता करते हुए वे सबकी आंखों के तारा थे । उनकी पत्नी रुचि कुमार इंडिया टीवी की संपादक हैं। आखिर ऐसा क्या था कमाल खान में ? बता रहे हैं वरिष्ठ देव श्रीमाली 

 

स्मृति शेष/कमाल खान

-देव श्रीमाली-

मीठी आवाज़..सधे हुए शब्द…जनहित के ख्याल और समाज के हित की भावनाओं का ध्यान रखकर रिपोर्टिंग करने वाले कमाल खान देश के सम्भवतया एकमात्र ऐसे रिपोर्टर रहे होंगे जो रिपोर्टिंग तो महज एक सूबे उत्तर प्रदेश की करते थे लेकिन उनको देखने – सुनने वाले पूरे देश ही नहीं पूरी दुनिया मे थे। बगैर पूर्व लिखी स्क्रिप्ट के …कभी कविता..कभी शायरी तो कभी चौपाई से अपनी कहानी का आदि या अंत करने वाले कमाल की खबर में न हड़बड़ी होती थी न चिल्लपों । वे हंगामों के बीच न अपनी सादगी खोते थे और न संयम ।
कमाल खान नही रहे। यह खबर पहले अफवाह लगी लेकिन बाद में अफवाह भी अफवाह निकल गई। वे नहीं रहे । उन्हें हार्ट अटैक आया और वह मधुर जुबां सदैव के लिए शांत हो गई । एनडीटीवी के कारण मुझे कई बार उनसे मिलने और काम करने का भी मौका मिला। कमाल भाई उम्दा इंसान और कमाल के सहज व्यक्ति थे। अपने अधीनस्थ हों,गांव ,गली के लोग हों ,सभी मे तत्काल घुल – मिल जाया करते थे । वे अपने अधीनस्थों के लिए बड़े मददगार थे। कर्म पर इतना फोकस रखते थे कि इतने सीनियर ओहदे पर होने के बावजूद सड़को पर जाकर रिपोर्टिंग करना न छोड़ा।
मीडिया के इस एक अजातशत्रु ध्रुवतारे का अस्त होना काफी दिनों तक या यूं कहें सदैव अखरेगा।
#बहुत_याद_आओगे_कमाल_भाई
#विनम्र_श्रद्धांजलि

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