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खास खबर:त्वचा व पेट सम्बन्धी रोगों के निदान में सहायक होगा  डाॅ. वीरेन्द्र को शोध

खास खबर:त्वचा व पेट सम्बन्धी रोगों के निदान में सहायक होगा  डाॅ. वीरेन्द्र को शोध

महात्मा गांधी चित्रकूट विश्व विद्यालय
लय चित्रकूट के रसायन विज्ञान के शोध छात्र डाॅ. वीरेन्द्र ने त्वचा संबंधी रोगों की रोकथाम एवं खाद्य पदार्थो के प्राकृतिक संरक्षण के लिए अपना शोध कार्य प्रस्तुत किया । डाॅ. वीरेन्द्र का विषय ‘‘कक्पेरेटीव केमिकल एंड फाइटो केमिकल स्क्रीनिंग एंड फार्मोकोजेनेटिक इवेन्यूवेषन आॅफ आॅक्जीलम इंडीकम एंड मेलिना अरबोरिया‘‘ पर शोध किया है। इन्होेने बताया  सोनापाठा का बाटनीकल नाम आॅक्सीलम इंडीकम तथा  गम्भारी का मेलिना अरबोरिया का नाम  है। ये दोनों पौधे की जड़े का उपयोग दवाई के रूप में किया जाता रहा है। शहरीकरण  और औद्योगिकरण के कारण ये पौधे विलुप्त  होने लगे है। ये पौधे चमड़ी, पेट संबंधी विकारों को दूर करने के लिए इसका उपयोग औषधि के रूप में किया जाता है। डाॅ. वीरेन्द्र कहते है कि शोध में ये दोनों पौधे की पत्ती, छाल, तथा जड़ पर पर प्रयोग किया है।  इन्होने बताया कि ये पौधे के जड़ में औषधीय गुण  से ज्यादा इनकी पत्तीयों मे अधिक औषधीय गुण उपस्थित है। इन दोनों पौधों की पत्तीयों में सारे औषधिय गुण उपस्थित है तो इसकी जड़ का उपयोग न किया जाए। इससे ये वनस्पति भी संरक्षित रहेगें और इनका लाभ आने वाली पीढ़ियां भी ले सकेगी।
 डाॅ. वीरेन्द्र ने बताया कि पीएचडी के दौरान इन्होने राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय शोध संगोष्ठीयों में बारह से अधिक शोध पत्र प्रस्तुत किए है। डाॅ. वीरेन्द्र ने अपना शोध डाॅ. वंदना पाठक के निर्देषन में अपना शोध अध्ययन पूरा किया। डाॅ. वीरेन्द्र ने अपनी सफलता का श्रेय चित्रकूट विष्वविद्याालय के कुलपति प्रो. एन.सी. गौतम, विज्ञान डीन प्रो. आई. पी. त्रिपाठी, अभय महाजन, महंत भास्कर दास, माता-पिता, बड़े भैया-भाभी, दोस्तों और विद्यार्थीयों को दिया है। डाॅ. वीरेन्द्र ने कहा कि शोध के दौरान सभी परिवारजन, शिक्षक, सहपाठियों ने अमूल्य योगदान दिया।
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