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थम नहीं रहा सैनिकों के साथ बर्बरता का सिलसिला

प्रमोद भार्गव इमरान खान के नेतृत्व में नई सरकार बनने के बाद उम्मीद की जा रही थी कि अब पाकिस्तान के रुख में बदलाव आएगा और मैत्री भाव नए सिरे से पनपेगा। ऐसी अपेक्षा इसलिए भी थी, क्योंकि इमरान एक बड़े क्रिकेट खिलाड़ी रहे हैं। खेल में जय-पराजय किसी की …

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एससीएसटी मंडल आयोग के ग्रहण का साया

  – डॉ ए के मिश्रा –  90 के दशक में पूर्व प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप जब कांग्रेस से निकल कर अलग पार्टी के रूप में अपने आप को स्थापित किया तब हिंदुस्तान की जनता  और मुलायम सिंह एवं चौटाला आदि की पार्टियों ने उन्हें भरपूर समर्थन दिया और वह देखते …

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सवालों के घेरे में राफेल ?

-प्रमोद भार्गव- लड़ाकू विमान राफेल की खरीद में जिस तरह के वाद-विवाद सामने आ रहे हैं, उससे लगता है, दाल में कुछ काला संभव है। इस सौदे को लेकर फ्रांस के पूर्व राश्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद ने मीडिया पार्ट नामक वेबसाइट को दिए साक्षात्कार में कहा है कि 58000 करोड़ रुपए …

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न्यायालयों में न्यायधीशों  भारी कमी के मायने

संदर्भः- केंद्रीय विधि मंत्रालय का आंकड़ा, 6000 से ज्यादा न्यायधीशों  की कमी -प्रमोद भार्गव- हमारे यहां संख्या के आदर्ष अनुपात में कर्मचारियों की कमी बनी ही रहती है। ऐसा केवल न्यायालयों में हो, ऐसा नहीं है, पुलिस, षिक्षा और स्वास्थ्य विभागों में भी गुणवत्तापूर्ण सेवाएं उपलब्ध न कराने का यही …

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मंदिर-मंदिर,मस्जिद,मस्जिद सियासत

@राकेश अचल आम चुनावों से पहले ही सियासत की धुरी पूजाघरों के इर्दगिर्द चक्कर काटने लगी है.सत्तारूढ़ भाजपा और विपक्ष ने मस्जिद-मस्जिद,मंदिर-मंदिर माथा टेकना शुरू कर दिया है. अगर देश का मतदाता मूर्ख नहीं है तो आसानी से समझ सकता है की सत्ता तक पहुँचने वाले दलों का असल एजेंडा …

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बहुत कुछ कहती है शेरिना कपानी कि जीवन यात्रा 

                                      – स्टेट ब्यूरो – मुम्बई। सफलता सुविधाएँ देती है लेकिन सफलता पाने वाला कुछ और की  तलाश में सुविधाओं से पीछा छुड़ाते हुए कुछ नया । कुछ और प्रेणादायक । और …

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स्मृति शेष :विलक्षण व्यक्तित्व के धनी संपादक थे श्याम जी

                 – राकेश अचल – बात उन दिनों की है जब मै ग्वालियर के दैनिक भास्कर संस्करण में सिटी रिपोर्टर था ,शयद ये 1986 -87  की बात हो ,श्याम जी को ग्वालियर संस्करण का सम्पादक बनाकर भेजा गया .अखबार के दफ्तर के पास …

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किराए की खोली छोड़ जगदीश रहेगा अब आलीशान फ्लेट में

  ग्वालियर ।जगदीश ने जीवन भर जी-तोड़ मेहनत की। दिहाड़ी मजदूरी कर घर का खर्च चलाया और तीन बेटियों के हाथ भी पीले किए। अपनी सामर्थ्य के अनुसार तीनों बेटियों और दो बेटों को पढ़ाया भी। जगदीश अब वृद्धावस्था में पहुँच गए हैं। युवावस्था में अपने लिए एक पक्के घर …

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