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6वीं से 8वीं की क्लास 18 महीने बाद शुरू हुए; 9वीं से 12वीं तक की क्लास भी डेढ़ साल बाद 50% की क्षमता के साथ

6वीं से 8वीं की क्लास 18 महीने बाद शुरू हुए; 9वीं से 12वीं तक की क्लास भी डेढ़ साल बाद 50% की क्षमता के साथ

मध्यप्रदेश में करीब डेढ़ साल बाद स्कूली बच्चों का इंतजार खत्म हुआ है। आज यानी 1 सितंबर से 6वीं से 12वीं तक की सभी क्लासेस रोजाना (रविवार को छोड़कर) लगना शुरू हो गईं। क्लास में 50% बच्चे उपस्थित रह सकते हैं। इसके कारण एक बच्चे को सप्ताह में सिर्फ तीन दिन ही स्कूल आना होगा। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के निर्देश के बाद पांच दिन पहले स्कूल शिक्षा विभाग ने स्कूल खुलने के आदेश जारी किए थे। स्टाफ को वैक्सीन का कम से कम एक डोज लगना अनिवार्य है।

50% की क्षमता से ही क्लास लगाने के निर्देश के कारण एक बच्चा सप्ताह में तीन ही क्लास अटेंड कर सकेगा। शासन की गाइडलाइन के अनुसार स्कूल में प्रार्थना से लेकर अन्य गतिविधि में बच्चों के एक जगह जमा होने पर बंदिश है।

स्कूलों तक में स्टूडेंट्स आपस में कोई सामान न ले सकेंगे और न ही दे सकेंगे। छात्रों को खाने का सामान साथ लाना होगा। स्कूलों में पीने के पानी की व्यवस्था तो की है, लेकिन सभी बच्चों को पानी साथ लाने की सलाह दी गई है। प्राइवेट स्कूल ने कैंटीन जैसी सुविधा बंद रखने का निर्णय लिया है, तो सरकारी स्कूल में मध्यान्ह भोजन नहीं मिलेगा।

अभी इस तरह स्कूल चल रहे

  • सिर्फ 50% क्षमता के साथ 9वीं से 12वीं की क्लास लग रही हैं। 11वीं और 12वीं की क्लास सप्ताह में दो दिन है। 9वीं और 10वीं की क्लास सप्ताह में एक दिन।
  • जहां बच्चों के बैठने की समुचित व्यवस्था नहीं है, वहां सप्ताह में एक दिन छोटे-छोटे ग्रुप में क्लास लगाई जा रही।
  • बच्चों को स्कूल भेजने के लिए अभिभावकों की अनुमति जरूरी होगी।
  • स्कूल में कोरोना से निपटने के लिए सभी तरह के तरीके जैसे सैनिटाइजर, मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन अनिवार्य।
  • सभी शिक्षकों और कर्मचारियों का 100% वैक्सीनेशन अनिवार्य।
  • बच्चे की तबीयत खराब होने पर उसे तत्काल अस्पताल ले जाने के साथ ही अभिभावकों को सूचना देना अनिवार्य है।
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