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बाढ़ राहत मे राजनीति,सर्वे टीम के विरोध में धरने पर बैठे ग्रामीण, राज्यमंत्री और तहसीलदार पहुंचे तब 36 घंटे बाद माने

बाढ़ राहत मे राजनीति,सर्वे टीम के विरोध में धरने पर बैठे ग्रामीण, राज्यमंत्री और तहसीलदार पहुंचे तब 36 घंटे बाद माने

भिंड । जिले में बाढ़ प्रभावित गांवों में प्रशासनिक अफसरों द्वारा इनदिनों सर्वे कराना और राहत देने शुरू हो चुका है। गांव स्तर पर सर्वे को लेकर राजनीति हावी हो रही है। राजनेताओं के संरक्षक सर्वे को मनमाने तरीके से करा रहे हैं। ऐसा ही एक मामला रौन ब्लॉक के पढ़ौरा गांव में सामने आया। यहां सर्वे से असंतुष्ट गांव के लोग धरने पर बैठ गए। इस खबर से शासन और प्रशासन में हड़कंप मच गया। शासन की ओर से राज्यमंत्री ओपीएस भदौरिया और प्रशासन की ओर से तहसीलदार रामनिवास धाकड़ मौके पर पहुंचे। इस दौरान अंसतुष्ट लोगों को समझाया गया। सर्वे के लिए पांच सदस्यीय दल गठित की गई, तब कही 36 घंटे बाद धरना-प्रदर्शन खत्म हुआ।

सिंध और चंबल नदी की बाढ़ से जिले के 67 से ज्यादा गांव तबाह हो गए। अब तक इन गांव में सब कुछ सामान्य नहीं हुआ। यहां बाढ़ की वजह से लोग दाने दाने के लिए मोहताज हो रहे हैं। अब इन गांव में राजनीति हावी हो रही। भाजपा और कांग्रेस से जुड़े सरपंच अपने चहेतों का ज्यादा नुकसान और विरोधी का कम होने की बात कहकर सर्वे दल पर राजनीतिक प्रेसर बना रहे हैं। ऐसा ही पढ़ौरा गांव में हुआ। यहां के 50 से ज्यादा लोग शुक्रवार की सुबह से धरने पर बैठ गए।

यह जानकारी लगते ही राज्यमंत्री ओपीएस भदौरिया और रौन तहसीलदार रामनिवास धाकड़ मौके पर पहुंचे। राज्यमंत्री भदौरिया से गांव के लोगों ने सरपंच के दबाव में सर्वे होने की बात कही। आरोप था कि जिन लोगों का 70 से 90% नुकसान हुआ उनका 10 से 30% नुकसान दर्ज की जा रही है। इस पर तहसीलदार ने 5 सदस्यीय दल गठित कर सर्वे का मूल्यांकन कराने और बाढ़ पीड़ितों की मुआवजा दिलाए जाने की बात कही। इसके बाद शनिवार शाम धरना खत्म किया गया।

राज्यमंत्री ओपीएस भदौरिया ने गांव वालो को भरोसा दिलाया की सर्वे में किसी तरह की कोताही नहीं बरती जाएगी। उन्होंने कहा सभी बाढ़ प्रभावित ग्रामीणों के हितों का ध्यान रखा जाएगा और हर सम्भव मदद मुहैया करायी जाएगी।

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