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रंगमंच कलाकार ने लिखी चिट्ठी: भिंड ट्रेक पर बढायें ये 13 ट्रेनें

रंगमंच कलाकार ने लिखी चिट्ठी: भिंड ट्रेक पर बढायें ये 13 ट्रेनें

इलेक्ट्रिफिकेशन होने के बाद ग्वालियर- इटावा ट्रेक पर तेरह और  ट्रेन चलाने की दरकार ।समाजसेवी और रंगमंच के कलाकार ने रेलमंत्री को चिट्ठी लिखकर की ये ट्रैन चलाने की मांग
भिंड। जाने – माने व्यवसाई और भारत भवन से जुड़े रहे देश के प्रसिद्द रंगकर्मियों में शुमार राजेश सिंह भदौरिया ने रेलमंत्री को पत्र लिखकर अनेक ट्रैन अब ग्वालियर से इटावा ट्रेक के जरिये वाया डायवर्ट करने का आग्रह किया ताकि लोगो का समय ,श्रम और धन कि बचत हो सके और भिंड आयर इटावा के लोगो को कुछ और ट्रेन मिल सकें ।
श्री भदौरिया ने पत्र में लिखा है कि भिण्ड से इटावा रेल लाइन जुड़े तकरीबन पाॅंच साल से ऊपर हो गए हैं परन्तु सरकार का इतना खर्चा होने के बावजूद भी उक्त लाइन पर मात्र तीन गाड़ियाॅं चल रहीं हैं जिनमें से कोरोना महामारी के कारण वर्तमान में मात्र एक ग्वालियर-इटावा पेसेन्जर का संचालन किया जा रहा है। गाड़ियाॅं चलाने का प्रपोजल रेलवे बोर्ड, नई दिल्ली पाॅंच साल पहले ही भेज दिया गया है परन्तु आज तक वह अधर में लटका हुआ है। बिन्दुवार एजेन्डा निम्नलिखित है-
1. पूर्व प्रधान मंत्री स्व. श्री अटल बिहारी बाजपेयी जी के 91 वें जन्मदिन पर चलने वाली सुशासन एक्स्प्रेस गाड़ी क्र. 11111/12 को 25.12.2014 से ग्वालियर-भिण्ड-इटावा के रास्ते बलरामपुर तक चलाया जाना था परन्तु भिण्ड से इटावा रेल खण्ड चालू होने हेतु सीआरएस महोदय द्वारा एन ओ सी न मिलने के कारण आनन फानन में उक्त गाड़ी को ग्वालियर से निजामुद्दीन के रास्ते लखनऊ होते हुए बलरामपुर के लिए चलाया गया जिसको ग्वालियर से निजामुद्दीन व लखनऊ होते हुए बलरामपुर तक पहॅुंचने में कुल दूरी 957 कि.मी की दूरी तय करने में 15 घण्टे लगते हैं। उक्त गाड़ी को उसके पूर्व निर्धारित मार्ग भिण्ड-इटावा-कानपुर होते हुए चलाया जाए तो 465 कि.मी का फेर बचने के साथ साथ ग्वालियर से बलरामपुर की 492 कि.मी की दूरी तय करने में मात्र 06 से 07 घण्टे लगेंगे जिससे यात्रियों के पैसा व समय के साथ-साथ सरकार का राजस्व भी बचेगा। उल्लेखनीय है कि ग्वालियर से पहले से ही काफी ट्रेनें दिल्ली के लिए संचालित हैं व दिल्ली से लखनऊ के लिए भी गाड़ियों की कोई कमी नहीं है। अगर सुशासन एक्स्प्रेस को भिण्ड-इटावा-कानपुर होते हुए संचालित किया जाता है तो पूर्व प्रधानमंत्री स्व. श्री अटल बिहारी जी को सच्ची श्रद्धांजली देने के साथ साथ कई वर्षों से धूल खा रही करोड़ों रूपये खर्च करके तैयार की गई भिण्ड-इटावा रेल लाइन भी देश के बड़े-बड़े रेलवे स्टेशन जैसे कानपुर, लखनऊ इत्यादि से सीधा सम्पर्क हो जाएगा।
2. ओखा-गोरखपुर एक्सप्रेस ( गाड़ी क्र. 15045/46) व सूरत-मुजफ्फरपुर एक्सप्रेस गाड़ी क्र. 19053/54 जो कि गुना-बीना-झाॅंसी-ग्वालियर-आगरा होते हुए लगभग 262 कि.मी. का फेर खाते हुए इटावा पहॅुंचतीं हैं। उक्त दोनों गाड़ियों को सीधा गुना-शिवपुरी-ग्वालियर- भिण्ड होते हुए इटावा डायवर्ट किया जाए तो 262 कि.मी का फेर बचेगा और साथ ही साथ बीना में इंजन दिशा परिवर्तन का झंझट व उसमें लगने वाले समय से निजात भी मिलेगी। साथ ही भिण्ड के जनमानस को सीधे सुरत, ओखा, अहमदाबाद, कानपुर, लखनऊ, अयोध्या गोरखपुर इत्यादि के लिए गाड़ी मिलेगी। उक्त दोनों गाड़ियों के भिण्ड होते हुए डायवर्सन के लिए  प्रपोजल तकरीबन 5 साल पहले ही रेलवे बोर्ड भेजा चुका है परन्तु रेल प्रशासन का ध्यान इस ओर बिल्कुल नहीं है।
3. भिण्ड से भोपाल के लिए काफी समय से गाड़ी की माॅंग की जा रही है परन्तु प्रशासन ने इसपर कोई अभी तक कोई निर्णय नहीं लिया है।
4. इन्दौर से भोपाल, झाॅंसी, कानपुर होते हुए बनारस, पटना व गोवाहाटी के लिए पर्याप्त मात्रा में गाड़ियों का संचालन किया जाता है। इसी तरह अगर इन्दौर से गुना-शिवपुरी-ग्वालियर-इटावा होते हुए गुवाहाटी तरफ कोई गाड़ी  चलाई जाए तो दोनों तरफ से समान दूरी तय करते हुए गुना, शिवपुरी, ग्वालियर व भिण्ड की जनता को कानपुर, इलाहबाद, पटना होते हुए गुवाहाटी असम तरफ यात्रा करने में आसानी होगी। जैसा कि विदित है भिण्ड जिला से भारतीय सेना में सबसे ज्यादा सैनिक सेवा प्रदान कर रहे हैं जिनको असम, मेघालय व अरूणाचल प्रदेश आने- जाने हेतु कानपुर या इटावा से गाड़ियों पकड़नी पड़तीं हैं।
5. मुम्बई से वेस्टर्न लाइन होते हुए रतलाम, शिवपुरी ग्वालियर इटावा होते हुए लखनऊ, गोरखपुर, पटना व गोवाहाटी के लिए ट्रेनें शुरू होनी चाहिए।
6. झाॅंसी से इटावा लिंक एक्स्प्रेस गाड़ी क्र. 11801/02 का स्टाॅपेज शनीश्चरा, गौहद, फुफ व उदी होना चाहिए। उक्त ट्रेन को भिण्ड से इटावा 37 कि.मी का सफर तय करने में 01 घण्टा 50 मिनट लगता है इसके बावजूद भी फूफ व उदी उक्त गाड़ी का स्टाॅपेज नहीं दिया गया है। इसके अलावा उक्त ट्रेन इटावा पहुॅंचने के बाद रात भर 6-7 घण्टे इटावा ही खड़ी रहती है। अगर उक्त ट्रेन को कानपुर तक बड़ाया जाए तो झाॅंसी, दतिया, डबरा, ग्वालियर, भिण्ड के यात्रियों को कानपुर तक यात्रा करने में सुविधा उपलब्ध हो जाएकी।
7. 2018 में झाॅंसी से ग्वालियर इटावा होते हुए पटना के लिए साप्ताहिक समर स्पेशल ट्रेन का संचालन तकरीबन 4-5 महीने तक किया गया था। उक्त गाड़ी में यात्रियों की भीड़-भाड़ देखते हुए प्रशासन ने अतिरिक्त फेरे भी बड़ाए थे जिससे रेलवे की काफी आमन्दनी हुई। परन्तु उक्त ट्रेन को बंद कर दिया गया। उक्त रूट पर गाड़ी का संचालन किया जा सकता है।
8. रतलाम-भिण्ड इन्टरसिटी एक्स्प्रेस जिसका संचालन सप्ताह में तीन बार है।  उक्त गाड़ी का संचालन नियमित होना चाहिए। इसके अतिरिक्त उक्त ट्रेन भिण्ड आने के बाद 7 घण्टे खड़ी रहती है। उक्त ट्रेन को कानपुर तक बड़ा दिया जाना चाहिए।
9. भोपाल से झांसी, ग्वालियर भिंड, इटावा, टुण्डला, अलीगड़ गाजियाबाद होते हुए दिल्ली के लिए ट्रेन चालू की जाए,   जिससे कि भिंड  से भोपाल और दिल्ली को एक सीधी ट्रेन मिल जाएगी और काफी समय से की जा रही दिल्ली और भोपाल की ट्रेन की मांग भी पूरी हो जाएगी। भिंड से दिल्ली और भोपाल के लिए सीधी ट्रेन के  संबंध में भिंड सांसद द्वारा माननीय रेल मंत्री से मांग भी की जा चुकी है l
10. पूर्व प्रधान मंत्री स्व. श्री अटल बिहारी बाजपेयी के सपनो की रेलवे लाइन उदी बटेश्वर होते हुए ग्वालियर से भिण्ड, उदी, बटेश्वर, आगरा के लिए सर्कुलर ट्रेन चलाई जाए।
11. सुबह 11.00 बजे से शाम 18.00 बजे तक भिण्ड से कोई ट्रेन ग्वालियर के लिए नहीं है। इस समय अन्तराल में कम से कम दो ट्रेनें चालू की जाऐं।
12. गाड़ी क्र 09165/09166/09167/09168 साबरमती एक्सप्रेस जो कि अहमदाबाद से लेकर  बनारस/दरभंगा जाती है जो कि गुना से बीना पहुँचती है जहां उसके इंजन का दिशा परिवर्तन होता है तदुपरांत बीना से झांसी होते हुए कानपुर 492 किलोमीटर की दूरी तय करती हुई पहुंचती है अगर यही ट्रेन गुना से सीधा शिवपुरी-ग्वालियर-इटावा होते हुए कानपुर संचालित की जाती है तो इसमें 10 किलोमीटर कम बचत होते हुए 483 किलोमीटर यात्रा करते हुए कानपुर पहुंचेगी और साथ ही साथ इंजन दिशा परिवर्तन का झंझट व उसमें लगने वाले समय से निजात भी मिलेगी। उपरोक्त गाड़ी को ग्वालियर इटावा होते हुए संचालित करने हेतु रेलवे बोर्ड में प्रपोजल भेजा जा चुका है परंतु अभी तक कोई भी सुनवाई नहीं हुई है ।
13. गाड़ी क्र. 04185/86 ग्वालियर-बरौनी मेल जो कि  317 किलोमीटर की दूरी तय करते हुए वाया झाँसी से कानपुर पहुंचती है जिसे अगर सीधा ग्वालियर से इटावा होते हुए डायवर्ट किया जाए तो गाड़ी 257 कि. मी. की दूरी तय कर कानपुर पहुँचेगी जिसमे झांसी स्टेशन पर होने वाले इंजिन दिशा परिवर्तन व उसमे लगने वाले अवांछनीय समय की बचत होगी इसके अतिरिक्त 60 कि.मी. का फेर भी बचेगा। उक्त ट्रैन को ग्वालियर से वाया इटावा  डायवर्ट करने हेतु प्रपोजल रेलवे बोर्ड भेजा गया है परंतु इस पर अभी तक कोई भी विचार नहीं किया गया
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