Now Reading
हरियाली तीज :सोने-चांदी के हिंडोले में विराजमान हुए बांके बिहारी; रात में थकान दूर करने के लिए सजेगी फूलों की सेज

हरियाली तीज :सोने-चांदी के हिंडोले में विराजमान हुए बांके बिहारी; रात में थकान दूर करने के लिए सजेगी फूलों की सेज

पूरा ब्रज हरियाली तीज पर आज उल्लास में डूबा है। मथुरा-वृंदावन में जन्माष्टमी से पहले हरियाली तीज धूमधाम से मनाया जा रहा है। भगवान बांके बिहारी सोने-चांदी के हिंडोले (झूले) में विराजमान हो चुके हैं। साल में सिर्फ एक दिन हरियाली तीज पर बांके बिहारी सोने और चांदी के हिंडोले में विराजमान होते हैं। फोटो खींचने पर बैन होने के बावजूद हिंडोले पर विराजमान बांके बिहारी की मनोहारी फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हो गई।

बांबे बिहारी के दर्शन के लिए दिल्ली, हरियाणा, उत्तराखंड समेत कई प्रदेशों से श्रद्धालु पहुंच चुके हैं। पूरा मंदिर परिसर राधे-राधे और ठाकुरजी के जयकारों से गूंज रहा है। आम दिनों से आज ठाकुरजी तीन घंटे अधिक भक्तों को दर्शन देंगे। मान्यता है कि ठाकुरजी को थकान आ जाती है। इसलिए रात में उनके लिए फूलों की सेज सजेगी।सुबह 7:45 बजे मंदिर के पट श्रद्धालुओं के लिए खोले गए। दोपहर दो बजे तक दरबार खुला रहेगा। शाम 5 बजे से रात 11 बजे तक फिर बांके बिहारी दर्शन देंगे। मंदिर में प्रवेश सिर्फ एक मार्ग से कराया जा रहा है। गेट नंबर तीन से श्रद्धालुओं के प्रवेश और चार नंबर गेट से निकासी की व्यवस्था की गई है।

द्वापर युग में भगवान कृष्ण ने राधा रानी को झूला झुलाया। तभी से मथुरा में बृज में झूलन उत्सव की यह परम्परा चली आ रही है। मथुरा के कुछ मंदिरों में हरियाली तीज से लेकर रक्षाबंधन तक 13 दिन तक भगवान को झूले में विराजमान किया जाता है।

जबकि, बांके बिहारी मंदिर में साल में एक बार केवल हरियाली तीज झूला दर्शन होते हैं। इस दिन महिलाएं गोपियों के रूप में अपना सोलह श्रृंगार करती हैं और घेवर फेनी का कान्हा को भोग लगाती हैं। मल्हार गाकर राधा-कृष्ण की झूलन लीला को जीवंत करती हैं।

View Comments (0)

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Scroll To Top