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गुना के सोडी गांव में फंसे 200 लोग:NDRF ने शुरू किया रेस्क्यू ऑपरेशन

गुना के सोडी गांव में फंसे 200 लोग:NDRF ने शुरू किया रेस्क्यू ऑपरेशन

मध्यप्रदेश में सिंध, पार्वती, कूनो और चंबल नदी की बाढ़ अब भी मुसीबत बनी हुई हैं। गुना और आसपास के क्षेत्रों में शुक्रवार को हुई बारिश के बाद कूनो, पार्वती और सिंध का जल स्तर फिर बढ़ गया है। पार्वती के किनारे बसा सोडी गांव पानी से घिरा हुआ है। यहां लगभग 200 लोग फंसे हुए हैं। इन्हें रेस्क्यू करने के लिए NDRF और सेना की टीम पहुंच गई है। शनिवार सुबह रेस्क्यू शुरू हो गया है। सुबह 9 बजे से शुरू हुए रेस्क्यू में हेलिकॉप्टर से 56 लोगों को सुरक्षित निकाल लिया गया है। हेलिकॉप्टर का फ्यूल खत्म होने पर भोपाल भेजा गया। रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए बेस कैंप राजस्थान के छबड़ा को बनाया गया है।

गुना में इन नदियों के उफान पर आने का असर ग्वालियर-चंबल के शिवपुरी, श्योपुर, दतिया भिंड-मुरैना और ग्वालियर में भी पड़ेगा। ये नदियां इन जिलों से होकर बहती हैं। फिलहाल सिंध का पानी इन इलाकों में कम है, लेकिन गुना में जलस्तर बढ़ने का असर यहां पर दिखेगा। इधर, चंबल नदी में जल स्तर फिर से बढ़ने लगा है। सुबह 3 बजे चंबल का जलस्तर 140 मीटर था जो पिछले 6 घंटे के दौरान बढ़कर 140.60 मीटर हो गया है।

शनिवार की सुबह 9 बजे की रिपोर्ट में चंबल का जलस्तर 60 सेंटीमीटर बढ़ गया है। विभाग के अधिकारियों की माने तो चंबल का जल स्तर फिलहाल बढ़ता जाएगा। यह दो मीटर तक और बढ़ेगा। इसके बाद कम होता जाएगा। विभाग का कहना है कि गुना व उसके आसपास के क्षेत्रों में बारिश होने से पार्वती नदी में पानी आ गया है। इसकी वजह से चंबल का जल स्तर बढ़ गया है।

शुक्रवार रात से ही गुना कलेक्टर और SP वहां मौजूद हैं। गुना की तरफ से फतेहगढ़ से इस गांव को जोड़ने वाला रोड पूरी तरह बंद है। इसके कारण धरनावदा से राजस्थान होते हुए टीम वहां पहुंची है। पार्वती की दो धाराओं के बीच में फंसकर यह गांव टापू बन गया है। पहले शुक्रवार-शनिवार की रात को ही रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू होना था, लेकिन लगातार पानी गिरने से यह शुरू नहीं हो सका था।

शनिवार सुबह यह शुरू हो पाया। सोडी गांव का संपर्क 15 दिनों से जिले से कटा हुआ है। उधर दूसरी तरफ सिंध नदी पूरे उफान पर है। म्याना के लहरघाट में सिंध पुल से 5 फ़ीट ऊपर बह रही है। इससे लहरघर में सिंध पर बना 50 फ़ीट पुल डूब गया है। म्याना-नईसराय मार्ग बंद हो गया है।

बमोरी इलाके के 20 गांव से 450 लोगों को निकालकर राहत शिविरों में रखा गया है। शुक्रवार को भारी बारिश के दौरान लम्बे समय से बिजली बंद है। इससे लोगों के मोबाइल तक बंद हो गए हैं। शुक्रवार देर शाम कुछ इलाकों में बिजली चालू हो सकी। अब इसे बाद जैसे-जैसे लोगों के फोन चालू हो रहे हैं और प्रशासन तक सूचना आ रही है, और लोगों को भी रेस्क्यू किया जा रहा है। राहत शिविरों में लोगों की संख्या और बढ़ सकती है। झागर, कूनो, पार्वती के उफान पर आने से अभी भी लगभग 50 गांव प्रभावित हैं। यहाँ से भी जैसे-जैसे सूचना आ रही है, लोगों को रेस्क्यू किया जा रहा है।

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