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बाढ़ में छतों पर 7 फीट से कम दूरी तक पहुंच रहा स्वदेशी हेलिकॉप्टर ध्रुव, ग्रामीणों को हाथ से ही ऊपर खींच लेते हैं जवान

बाढ़ में छतों पर 7 फीट से कम दूरी तक पहुंच रहा स्वदेशी हेलिकॉप्टर ध्रुव, ग्रामीणों को हाथ से ही ऊपर खींच लेते हैं जवान

ग्वालियर-चंबल में सिंध की बाढ़ में फंसी जिंदगियां बचाने के लिए ध्रुव भी मोर्चे पर उतर गया है। इस हेलिकॉप्टर की खासियत यह है कि यह अपने टारगेट के बेहद करीब तक पहुंच जाता है। छतों पर फंसे लोगों के पास आसानी से ध्रुव पहुंचकर ऑपरेशन कर रहा है। 7 फीट से भी कम दूरी होने की वजह से एयरफोर्स के जाबांज लोगों को हाथ पकड़कर खींच ले रहे हैं। इसकी वजह से रेस्क्यू में तेजी आई है।

शिवपुरी के करैरा ब्लॉक से लगे चितरी गांव में बुधवार को एडवांस लाइट हेलिकॉप्टर ने छत के नजदीक पहुंचकर सबको चौंका दिया। रस्सी डालने की जरूरत ही नहीं पड़ी। हेलिकाप्टर में मौजूद एयरफोर्स के जवानों ने छत पर खड़े लोगों को हाथों से ही अंदर खींच लिया। इस गांव में 44 लोगों को इसी तरह से बचाया गया। गुरुवार दोपहर को भी कैलारस के गोराकिला गांव में भी ऑपरेशन चलाया गया।ध्रुव हेलिकॉप्टर देश में ही बना है। इसे हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड ने तैयार किया है। ध्रुव ने पहली बार 1992 में उड़ान भरी थी। उसके बाद से यह भारतीय सेना के लिए हर स्तर पर मददगार साबित हुई।सर्दी के मौसम में लद्दाख में तापमान शून्य से नीचे चला जाता है। ऐसे मौसम में भी यह पेलोड ले जाने में कारगर साबित होते हैं। इसकी खूबियां इसे और हेलीकॉप्टरों से अलग बनाती है।

इसे तीनों सेनाएं इस्तेमाल कर रही हैं। किसी भी मिशन के लिए यह एक मल्टीरोल हेलीकॉप्टर है। इन हेलिकॉप्टरों के जरिए हथियार एवं अन्य उपकरण उन ऊंचाई वाले स्थानों पर ले जाए जा सकते हैं, जहां अन्य हेलिकॉप्टर उड़ान भरने में सक्षम नहीं हैं। लद्दाख सेक्टर में इस तरह के 20 से ज्यादा हेलिकॉप्टर सेना की मदद कर रहे हैं।

वर्तमान में, HAL सेना के लिए 41 हेलीकॉप्टरों, भारतीय नौसेना के लिए 16 हेलीकॉप्टरों, और भारतीय तटरक्षक के लिए 16 हेलीकॉप्टरों का उत्पादन कर रहा है। इसमें से 38 हेलिकॉप्टर का उत्पादन पहले ही हो चुका है और शेष का निर्माण 2022 तक पूरा हो जाएगा।

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