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राष्ट्रीय लेखन संघ ने साहित्यिक तरंग संगोष्ठी का किया आयोजन

राष्ट्रीय लेखन संघ ने साहित्यिक तरंग संगोष्ठी का किया आयोजन

ग्वालियर। राष्ट्रीय लेखक संघ के तत्वावधान में राष्ट्रीय साहित्यिक तरंग संगोष्ठी का आयोजन मंगलवार को ऑनलाइन किया गया। जिसमें देश भर के वरिष्ठ साहित्यकारों ने श्रीराम मंदिर संघर्ष पर प्रस्तुति दी। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो.ओमपाल सिंह ने की। कार्यक्रम में वरिष्ठ साहित्यकार डा.उमाशंकर राही उपस्थित रहे।

संगोष्ठी का शुभारंभ आभा सिंह ने खुरजा के साथ मां वीणावादिनी के स्वर-स्तवन से किया। वीणा के स्वर थे तू दे-दे हे मात वीणाधारी,करूॅ वंदना तुम्हारी ,रख लो लाज मां हमारी.. । इसके बाद गुना से डा.रमा सिंह ने भगवान श्रीराम के आदर्शों को रेखांकित करते हुए कहा कि श्री राम मंदिर के निर्माण के लिए समर्पण एवं सामाजिक समरसता का मार्ग सहेजना होगा। इस महासंघर्ष में बलिदान दिया है। इस अवसर पर संस्था के राष्ट्रीय संस्थापक डा.यशभान सिंह तोमर ने कहा कि हम सब का परम दायित्व है कि हमें भगवान राम के आर्देशों का सदा स्मरण करते हुए उन्हें अपने जीवन में आत्मसात करें। हमारी संस्कृति, भाषा, साहित्य एवं ग्रंथ विश्व में अग्रणी हैं । इन्हें सम्मान देते हुए नई पीढ़ी का मार्गदर्शन कर अपनी ऊर्जा राष्ट्र हित में लगाएं। साथ ही उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता प्राप्ति के सत्तर वर्षों बाद भी कोई कविता कालजयी नहीं हो सकी। इस पर चिंतन कर नव सृजन की आवश्यकता है। डा. उमाशंकर राही ने भी तत्कालीन मुख्यमंत्री द्वारा कारसेवकों पर प्रतिबंध लगाकर गोली चलाने की कार्रवाई में कोठारी वंधुओं की नृशंस हत्या का बहुत ही मार्मिक दृश्य प्रस्तुत कर उनके संघर्ष के अविस्मरणीय संस्मरण को साझा किया। कार्यक्रम का संचालन कमलेश मौर्य ने किया।कार्यक्रम में राम चरण “रुचिर” , हेमा जोशी, नैनीताल सहित अनेक साहित्य मनीषी उपस्थित रहे।

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