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कांग्रेस में कलह: आजाद, सिब्बल, चिदंबरम के बागी बोल पर भड़के अधीर रंजन, कहा- जाना है जाएं, नई पार्टी बना लें

कांग्रेस में कलह: आजाद, सिब्बल, चिदंबरम के बागी बोल पर भड़के अधीर रंजन, कहा- जाना है जाएं, नई पार्टी बना लें

कांग्रेस पार्टी में कलह लगातार बढ़ता जा रहा है। एक के बाद एक चुनावों में पार्टी की हार और शीर्ष नेतृत्व की कथित निष्क्रियता के खिलाफ बड़े नेता मुखर होने लगे हैं। सबसे पहले कपिल सिब्बल ने एक इंटरव्यू में पार्टी को आइना दिखाने की कोशिश की। अब पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिंदबरम और राज्यसभा सदस्य गुलामनबी आजाद ने भी यही किया है। आजाद ने तो खुलेतौर पर राहुल गांधी पर भी सवाल उठाए। इसके बाद पार्टी दो धड़ों में बंटी नजर आ रही है। एक धड़ा गांधी परिवार के साथ खड़ा नजर आ रहा है और दूसरा धड़ा वो है जो सोनिया गांधी और राहुल गांधी से सवाल कर रहा है। कपिल सिब्बल, गुलामनबी आजाद और चिदंबरम के बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष अधीर रंजन चौधरी ने यहा तक कह दिया है कि जिन नेताओं को लगता है कि कांग्रेस ठीक नहीं है, वो पार्टी छोड़ सकते हैं और अपनी अलग पार्टी भी बना सकते हैं।

गुलाम नबी आजाद: ‘कांग्रेस जमीन से संपर्क खो चुकी है। यहां कोई भी पदाधिकारी बन जाता है और फिर लेटरहेड और विजिटिंग कार्ड छपवाकर संतुष्ट हो जाता है। फाइव स्टार होटलों में बैठकर चुनाव नहीं जीते जाते हैं। यहां तो लोग टिकट मिलने के बाद फाइव स्टार में भी डीलक्स रूम ढूंढते हैं। जहां सड़कें खराब हों, वहां नहीं जाना चाहते। जिला अध्यक्ष, प्रदेश अध्यक्ष अगर चुनाव जीतकर बनता है, तो उसे अहमियत का अहसास होता है, लेकिन यहां तो कोई भी बन जाता है।’

पी. चिदंबरम: ‘जमीनी स्तर पर कांग्रेस की स्थिति खराब होती जा रही है। भाजपा के मुकाबले कांग्रेस की संगठनात्मक संरचना बहुत कमजोर है। बिहार में हमने ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़कर गलती की। पार्टी को सीटों के बंटवारे में केवल जीतने वाली सीटों को चुनना चाहिए, भले ही इनकी संख्या कम हो।’

कपिल सिब्बल: ‘लोगों ने अब कांग्रेस पार्टी को विकल्प के रूप में देखना बंद कर दिया है। यही नहीं, पार्टी के आला नेता ने भी एक सामान्य बात मना लिया है।’

सलमान खुर्शीद: पार्टी में नेतृत्व का संकट नहीं है। पूरी कांग्रेस सोनिया गांधी और राहुल के साथ है। अंधे ही हैं, जिन्हें सोनिया और राहुल के प्रति समर्थन नहीं दिखता है। सवाल उठाने वाले अगर खुद को लोकतांत्रिक मानते हैं, तो उन्हें समर्थकों के बारे में भी सोचना चाहिए। इसे पार्टी के भीतर तय किया जा सकता है कि किस पक्ष में ज्यादा लोग हैं। हमारी आपत्ति इस बात पर है कि पार्टी के बाहर बवाल किया जा रहा है।

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