Friday, January 22, 2021
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गुर्जर आंदोलन का तीसरा दिन:रेलवे ट्रैक पर ही मंगाए गए रजाई-कंबल और गद्दे, आंदोलनकारियों के लिए आसपास के गांव से हो रही खाने की व्यवस्था

गुर्जर तीसरे दिन मंगलवार को भी भरतपुर जिले के पीलूपुरा में रेलवे ट्रैक पर जमे हैं। जहां सुबह की शुरुआत एक बार फिर चाय बिस्किट के साथ हुई। इस बीच समाज की महिलाओं ने भी मोर्चा संभाला। आंदोलनकारियों के लिए आसपास के गांवों से खाना और बिस्तर आदि का इंतजाम हो रहा है। रात्रि को सर्दी से बचने के लिए गुर्जर ट्रैक पर ही अलाव जला रहे हैं। आसपास के गांवों से रजाई-कंबल आदि मंगाए गए हैं। आंदोलनकारियों के लिए ग्रामीणों की ओर से भोजन-नाश्ते की व्यवस्था की जा रही है।

इस बीच लोगों में चर्चा रही कि आंदोलन को 14 साल पूरे हो गए हैं। आरक्षण समेत अपनी अन्य मांगों को लेकर लगभग हर साल वे आंदोलन करते हैं। कई बार पटरियों पर बैठ चुके हैं। रेल यातायात बाधित होने से सैंकड़ों लोग परेशान होते हैं। सरकार के साथ वार्ताओं के दौर चलने के बाद समझौते किए जाते हैं।

दरअसल, गुर्जरों ने वर्ष 2006 में अनुसूचित जनजाति (एसटी) में आरक्षण की मांग को लेकर आंदोलन शुरू किया था। तब कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला के नेतृत्व में पहली बार हिंडौन में ट्रेनें रोकी गई थीं। इसके बाद वर्ष 2007 में पाटोली और वर्ष 2008 में पीलूपुरा में उग्र आंदोलन हुए। इस दौरान 72 युवाओ को शहादत भी हुई। इसके बाद से विभिन्न मांगों को लेकर गुर्जर आंदोलन करते आ रहे हैं। मीणा समुदाय के सख्त विरोध के बाद हालांकि गुर्जर अब एसटी में आरक्षण की मांग छोड़ चुके है।

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