Sunday, January 17, 2021
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कमलनाथ ने कहा किसी गद्दार की नही होगी कांग्रेस में वापिसी

भाजपा  ने अपने पूर्व
 विधायक को पार्टी से निकाला 
ग्वालियर । प्रचार का शोर थम गया है लेकिन अंतिम क्षणों में यहां जमकर सियासी दांव पेंच खेले जा रहे है । कांग्रेस हो या भाजपा सत्ता की चाबी झपटने में कोई कोर कसर नही छोड़ना चाहता । दोनो दलों को इस बात का भान है कि सत्ता के सिंघासन को बचाने अथवा फिर से पाने के लिए ग्वालियर चम्बल में बिछी धूल भरी कार्पेट पर चलकर जाना होगा लिहाजा कांग्रेस को या भाजपा अपना हर दांव खेला रही है । पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ अपने प्रचार अभियान का समापन करने सिंधिया की माद में ही आये तो भाजपा अपने कार्यकर्ताओं को अनुशासन का चाबुक दिखाने में जुट गई है । उसने अपने एक पूर्व विधायक को बाहर का रास्ता दिखाया ।
प्रदेश में पन्द्रह साल पुरानी भाजपा की सरकार के पतन की इबारत ग्वालियर चम्बल अंचल में ही लिखी गई थी । इस क्षेत्र ने कांग्रेस को सर्वाधिक विधायक दिए और कमलनाथ की ताजपोशी हुई । लेकिन लोकसभा चुनावों में पराजय के बाद दुखी वरिष्ठ नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया को उपेक्षा का दंश डसने लगा और उन्होंने अपने समर्थक विधायको का इस्तीफा कराके सरकार को गिरा दिया । वे स्वयं राज्यसभा सांसद बन गए और समर्थक विधायको में से कुछ मंत्री । 
कमलनाथ ने यह उप चुनाव गद्दार बनाम वफादार का बना दिया । प्रदेश में तीन नवम्बर को 28 सीट पर उप चुनाव होना है जिसमे सर्वाधिक 16 ग्वालियर चम्बल में है । इनके परिणामो पर शिवराज सरकार का भविष्य भी टिका है और ज्योतिरादित्य सिंधिया का । इन्ही की दम पर कमलनाथ फिर से सत्ता पर काबिज होने का सपना पाले बैठे है हालांकि भाजपा इसे मुंगेरीलाल के हसीन सपने करार देती है ।
यही बजह है कि भाजपा हो या कांग्रेस दोनो ने इसी अंचल को अपना केंद्र बनाया । भाजपा के लिए केंद्रीय मंत्री नरेंद्र तोमर ,मुख्यमंत्री शिवराज सिंह प्रदेश अध्यक्ष बीडी शर्मा और ज्योतिरादित्य सिंधिया एक पखबाड़े से उड़नखटोला लेकर गांव गांव घूमते रहे । दर्जनों मंत्री,पूर्व मंत्री और सांसद जातियों के हिसाब से प्रचार में जुटे है । उसने तमाम ऐसे नेताओं की पार्टी में वापिसी कर ली जो 2018 के चुनाव में बागी होकर चुनाव लड़ चुके थे । भिंड से नरेंद्र सिंह कुशवाह और ग्वालियर में समीक्षा गुप्ता की भी वापिसी हो गई जबकि प्रचार थमने के कुछ घण्टे फके एक बड़ा फैसला लेते हुए सुमावली से विधायक रहे सत्यपाल सिंह सिकरवार नीटू को भाजपा से निकाल दिया । उनके बड़े भाई डॉ सतीश सिकरवार ग्वालियर पूर्व से काँग्रेस उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ रहे हैं । शिकायते थी कि वे अपने भाई का प्रचार कर रहे है । भाजपा ने उन्हें मान्धाता जाने को कहा था लेकिन वे नहीं गए ।
सिंधिया को उन्ही की मांद में चुनौती
उधर कांग्रेस ने भी इसी अंचल को अपना गढ़ बनाकर रखा । उसके अनेक पूर्व मंत्री महीनों से विधानसभा क्षेत्रों में जमे हुए है और कार्यकर्ताओं को एकजुट करने में लगे रहे । पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भी अंचल में धुआंधार प्रचार कर बिकाऊ और टिकाऊ और गद्दार का मुद्दा गांव कस्बो तक पहुंचकर रोमांचक बना दिया । शुक्रवार को शिवराज और सिंधिया ने भाजपा के सभी नेताओं के साथ मुरैना,ग्वालियर और मेंहगाव में रोडशो करके एकजुटता का संदेश देने का प्रयास किया तो प्रचार थमने के अंतिम दिन कमलनाथ अपनी रणनीति के चलते चम्बल और ग्वालियर पहुंचे । उन्होंने मुरैना में कांग्रेस प्रत्याशी राकेश मावई के समर्थन में विशाल रोडशो में भाग लिया।
ग्वालियर के इंटक मैदान में उन्होंने सुनील शर्मा के समर्थन में कार्यकर्ताओ की सभा को सबोधित करते हुए कहाकि – मैं ग्वालियर इसलिए आया क्योंकि मैंने तय किया कि खेल जहां से शुरू हुआ है वहीं आकर खत्म करूं। उन्होंने कहाकि कुछ लोगो ने अंचल की पहचान बदल दी । पहले इस क्षेत्र के लोगो को वफादार कहा जाता था लेकिन अब उसे दूसरे नाम से पुकारने लगे । यह चुनाव साबित करने का समय है कि यह क्षेत्र गद्दार नही बल्कि बफादार है । इसे खरीदने और बिकने वालों को जनता सबक सिखाना जानती है ।
कमलनाथ ने मंच से और बड़ी बात कही । विधायक प्रवीण पाठक ने कहाकि अंचल दशाब्दियों बाद महल की गुलामी से आज़ाद हुआ है अब उसे फिर गुलाम नही होने दिया जाएगा ,यह आश्वासन छाते है तो कमलनाथ ने कहाकि लोग भरोसा रखें बिकने वालों और गद्दारी करने वालों के लिए अब कांग्रेस के दरवाजे हमेशा के लिए बंद हो गए हैं।

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