Saturday, January 16, 2021
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ग्वालियर अंचल उप चुनाव:मीडिया शेयरिंग में भाजपा बहुत आगे,कांग्रेस का ध्यान निजी संपर्क पर

प्रचार मामले में भाजपा आगे,निजी संपर्क में कांग्रेस ।भाजपा का शानदार “वार – रूम’ और जानदार “मीडिया सेंटर” लेकिन कांग्रेस सिर्फ एक प्रवक्ता के भरोसे  

– देव श्रीमाली-
ग्वालियर अंचल के उप चुनावो के नतीजों से तीन परिणाम आने है । एक शिवराज सिंह की सरकार की उम्र का पता चलेगा । दो, गिर सत्ता में वापिसी का सपना देख रही कांग्रेस और फिर सीएम की गद्दी संभालने के सपने साकार होंगे और तीसरा मध्यभारत की राजनीति में सिंधिया परिवार भाजपा में भी उतनी ताकतवर भूमिका में रह पायेगा या नही ? यही बजह है कि भाजपा ने बीते पखबाड़े से ग्वालियर को मिनी राजधानी बना लिया है । सिंधिया पहली बार यही दिन रात एक कार रहे हैं।
जब उप चुनावो की सुगबुगाहट शुरू हुई थी तब कांग्रेस नेता दावा कर रहे थे कि कांग्रेस अपना “वार रूम” ग्वालियर में ही बनाएगी। पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ग्वालियर को ही हेड क्वाटर बनाएंगे । उनके लिए यहां मकान ढूंढा जा रहा है । फिर चार बार उनका ग्वालियर आगमन रद्द हुआ । हालांकि वे दो दिन के लिए जब पिछले माह आये तो  शो भाजपा और ज्योतिरादित्य सिंधिया दोनो के लिए चौंकाने वाला था । प्रेक्षकों के अनुसार यह ग्वालियर का अब तक का सबसे जबरदस्त भीड़ वाला रोड शो था ।
लेकिन इसके बाद से अंचल कांग्रेस के किसी भी नामवर नेताविहीन हो गया ।
लेकिन कमलनाथ की यात्रा के बाद भाजपा ने मोर्चा संभाला और अभी भी उसे गति दिए हुए है । भाजपा ने सभी 16 सीटों के चुनाव प्रचार अभियान को आगे बढ़ाने के लिए एक होटल को अपने वार रूम में तब्दील कर दिया । भाजपा के वरिष्ठ नेता प्रभात झा चौबीस घंटे इसी में रहते है । प्रचार के लिए भाजपा ने यहां एक सुव्यवस्थित और आधुनिक साधनों से सुसज्जित मीडिया सेंटर बनाया है । भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी लोकेंद्र पाराशर सके पखबाड़े से यही जमे है । वे हर विधानसभा क्षेत्र में मीडिया सेंटर्स खुलवाने और ट्रेनिग देने खुद गए । भाजपा के संभाग भर में चलने वाले आयोजनों के रीयल टाइम फ़ोटो,वीडियो और जानकारी वॉटशेप् और ईमेल के जरिये लगातार पहुंचाए जा रहे है ।  इस काम मे श्री पाराशर का सहयोग करने के लिए पवन सेन जिम्मा संभाल रहे है ।
नेताओ के दौरों के मामले में भाजपा “पोलिटिकल क्लाउड ” की रणनीति पर काम कर रही है । मसलन हर दिन हर विधानसभा क्षेत्र में कोई न कोई ऐसा नामी नेता मौजूद रहे जिसे मीडिया स्पेस मिले । पहले केंद्रीय मंत्री नरेंद्र तोमर लगभग सभी क्षेत्रो में गए और कार्यकर्ता बैठके ली ।  उनके दौरे के पूरे होने के पहले ही सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया का को पांच दिन का रोड मैप थमा दिया गया । वे भी हर ब्लॉक तक गए । सुबह शाम को ग्वालियर में वे भाजपा और आरएसएस के नेताओं से निजी मुलाकात करते रहे । उन्होंने संघ के प्रांतीय कार्यवाह यशवंत इंदापुरकर के घर जाकर उनसे भी गुप्त मंत्रणा की ।
सिंधिया के समानांतर भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बी डी शर्मा के दौरे शुरू हो गए । वे भी सभी क्षेत्रों में गए । इनके अलावा श्री झा,डॉ नरोत्तम मिश्रा ,अनूप मिश्रा और तमाम वर्तमान और पूर्व मंत्रियो के दौरे हुए । इन्हें जातीय समीकरण के हिसाब से पार्टी भेज रही है ।मीडिया सेंटर में हर रोज किसी बड़े नेता की प्रेस कॉन्फ्रेंस होती है और औसत हर दूसरे दिन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह अंचल में आते ही है ।
इसके उलट कांग्रेस का अभी तक न कोई मीडिया सेंटर बना है और न कोई वार रूम । कांग्रेस प्रवक्ता केके मिश्रा अकेले दम पर मोर्चा संभाले हुए है । हालांकि लगातार आक्रमण से वे सिंधिया को परेशान और भाजपा को असहज बनाये हुए है । बावजूद मीडिया कवरेज भाजपा को सत्तर फीसदी मिल रहा है क्योंकि कांग्रेस की बड़ी एक्टिविटीज कम है । मुरैना में ब्रजेन्द्र सिंह राठौर एक माह से डेरा डाले है लिहाजा उन्होंने स्थिति ठीक कर रखी है लेकिन संभागीय मुख्यालय खाली पड़ा है । यहां तक कि इनके प्रत्याशियों के चुनाव कार्यालय के उदघाटन में भी कोई बड़ा नेता नही आया जबकि भाजपा के कार्यालय शुरू करने तोमर ,सिंधिया, बीडी में से कोई न कोई अवश्य रहा लिहाजा उसे मीडिया स्पेस मिला ।
ग्वालियर सांसद विवेक शेजवलकर कहते है भाजपा प्रचार अभियान में बहुत आगे निकल गई है क्योंकि हमारा संगठन सब कुछ तय करता है । किसको कब कहां  जाना है ? यह पार्टी तय करती है । इस सैनिक की तरह पालन करना होता है । जबकि कांग्रेस का दावा है कि हम हो हल्ला नही जमीनी काम कर रहे है । कार्यकर्ता लोगो से सीधे मिल रहे है । कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष अशोक सिंह कहते है –  मैं तीन लोकसभा के टीम चुनाव लड़ चुका हूँ । मैने अपने पिता स्व राजेन्द्र सिंह के भी चुनाव देखे लेकिन कार्यकर्ताओ में ऐसी  एकजुटता और समर्पण  और जनता का नैतिक गुस्सा पहली दफा देखा है । भाजपा कार्यकर्ता अपने भविष्य को लेकर चिंतित है जबकि कांग्रेसी बदला लेने को उत्साहित । यह चुनाव जनता बनाम सरकार गिराने वालो के बीच है । परिणाम सबको पता है इकतरफा कांग्रेस के पक्ष में । हालांकि अभी सभी के पास सिर्फ दावे है ।

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