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गिद्धों की 6 प्रजातियों में केवल इजिप्शियन वल्चर बचे हैं भिण्ड में

गिद्धों की 6 प्रजातियों में केवल इजिप्शियन वल्चर बचे हैं भिण्ड में

 

भिण्ड, 6 सितंबर। सितंबर का पहला शनिवार विश्व गिद्ध संरक्षण दिवस के रूप में मनाया जाता है। कभी पूरी चंबल बेल्ट में कई प्रजातियों के गिद्ध बहुत संख्या में पाए जाते थे। अभी भी ग्वालियर किले के कुछ स्थानों पर, दतिया में, गांधी सागर में, कूनो में थोड़े बहुत कुछ देखने को मिल जाते हैं। भिण्ड में विगत 10 वर्षों से केवल सफेद गिद्ध जिसे इजिप्शियन वल्चर के नाम से जाना जाता है (गांव-देहात में से नउआ भी कहते हैं) मिलतें हैं।
आईयूसीएन रेड लिस्ट में इन्हें संरक्षित घोषित किया गया है। इनका जीवन बहुत खतरे में है। हो सकता है आने वाली पीढ़ी को यह भी देखने को ना मिले।
गिद्ध पक्षियों की ऐसी प्रजाति है जो मनुष्य के लिए बहुत उपयोगी है मरे हुए जानवरों को गिद्ध थोड़ी ही देर में समाप्त कर देते हैं जिससे तमाम प्रकार की बीमारियां फैलने से बच जाती है। अब गिद्धों का जीवन संकट में होने के कारण कई दिनों तक मरा हुआ पशु चलता रहता है एवं बीमारी फैलती रहती है।

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