Wednesday, January 20, 2021
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सियासी संकेत भी देता है रोपवे का काम फिर शुरू होना

रोपवे पर भाजपा और सांसद ने दिखाई ताकत सांसद की नाराजगी पर सरकार ने दिए बनाने के आदेश

-विशेष संवाददाता-
ग्वालियर । आखिरकार रोपवे निर्माण को लेकर ग्वालियर के सांसद विवेक नारायण शेजवलकर की नाराजगी भारी पड़ गई । प्रशासन द्वारा रहस्यमय तरीके से रोप- वे के निर्माण को रोकने के आदेश को राज्य शासन ने सांसद के कड़े पत्र के बाद खारिज कर एक बार फिर इसका निर्माण कार्य शुरू करने का आदेश दे दिया।
फूलबाग स्थित बारादरी के समीप से किले तक रोपवे निर्माण करना जनसंघ के जमाने से भाजपा का ड्रीम प्रोजेक्ट था । साठ के दशक में जब स्व नारायण कृष्ण शेजवलकर पहली बार मेयर बने तो तत्कालीन पार्षद और स्टैंडिंग कमेटी के चेयरमेन कक्का डोंगर सिंह की सहमति से रोपवे निर्माण का प्रस्ताव पारित किया गया था  , लेकिन भाजपा आरोप लगाती रही कि सिंधिया परिवार दिल्ली से इसमे अड़ंगे लगवाता रहा है । वह नहीं चाहता कि रोपवे बने क्योंकि उसका एक स्टैंड किले पर सिंधिया स्कूल के समीप बनना है जो सिंधिया स्कूल को नापसन्द है । तब से भाजपा लगातार चुनाव से लेकर सड़क तक यह मुद्दा उठाती रहे । भाजपा सांसद जयभान पवैया और नरेंद्र सिंह तोमर भी इसको लेकर मुखर रहे । भाजपा का मानना है कि रोप-वे से ग्वालियर में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा । यह प्रस्ताव दशकों तक बढ़ता और लटकता रहा ।
लेकिन सियासत के चलते धूल चाट रहे भाजपा के इस ड्रीम प्रोजेक्ट को एक बार फिर ऑक्सीजन मिली डेढ़ दशक पहले जब विवेक नारायण शेजवलकर पहली दफा महापौर बने । उन्होंने इसका फिर प्रोजेक्ट बनवाया । मप्र में भाजपा की सरकार बन चुकी थी लिहाजा यहां से एनओसी दिलवाने के बाद इसे दिल्ली से एनओसी दिलाने की कोशिश शुरू की गई । दिल्ली में भी भाजपा सरकार बनने और श्री तोमर के ग्वालियर से सांसद बनने तथा  मंत्री बनने से इसको और ताकत मिली और दिल्ली के अनेक विभागों में अटकी फाइल आगे बढ़ने लगी । श्री शेजवलकर लगातार इसके पीछे लगे रहे । क्लीयरेंस होते ही भव्यतापूर्वक इसका भूमिपूजन हुआ । इसे भाजपा की जीत के रूप में प्रचारित भी किया गया । इस प्रोजेक्ट पर काफी काम भी हो गया था लेकिन मप्र में कमलनाथ के नेतृत्व बाली  सरकार बनने के बाद इस काम की गति धीमी हो गई । भाजपा आरोप लगाती रही कि सिंधिया के दबाव में सरकार ये सब कर रही है। हालांकि इस काम पर नगर निगम साढ़े चार करोड़ रुपये से ज्यादा पैसा खर्च भी कर चुकी थी । प्रदेश में सियासी उथल पुथल हुआ । ज्योतिरादित्य सिंधिया के नेतृत्व में कांग्रेस सरकार गिराके एक बार फिर भाजपा की सरकार शिवराज सिंह के नेतृत्व में बनी । अफसरों की तैनाती होते ही एक आदेश से श्री शेजवलकर सहित पूरी भाजपा तब सन्न रह गयी जब प्रमुख अभियंता ने इसका निर्माण कर रही कम्पनी बालाजी दामोदर रोपवे एन्ड इंफ़्रा लिमिटेड को आदेश दिया कि वे अपर टर्मिनल पर खुदाई का काम तत्काल रोक दें । तर्क दिया कि उन्होंने एक दल भेजकर जांच कराई और उसकी रिपोर्ट को आधार बनाया जिसमे कहा गया था कि अपर टर्मिनल के लिए खोदी जा रही नींव की बजह से किले की दीवार को नुकसान हो सकता है । काम रुकने से  भाजपा नेताओं की सार्वजनिक छवि खराब हुई । उनमे बेचैनी महसूस होने लगी ।सांसद ने इस मामले पर आक्रामक रुख अपनाने का निर्णय लिया । उन्होंने इस मामले को संगठन और सत्ता से जुड़े नेताओ तक पहुंचाया ।
सरकार को लिखी चिट्ठी
संसद ने मुख्य सचिव और प्रमुख सचिव को जो पत्र भेजा उसमे लिखा – ग्वालियर किले पर रोप वे का काम 1 जनवरी 2019 से बंद है । जबकि समिति ने निरीक्षण एक साल बाद किया। अपर टर्मिनल में काम नगर निगम द्वारा स्वीकृत है और उसी अनुसार हो रहा था लेकिन दल ने उसका अवलोकन करना भी उचित नही समझा ।
श्री शेजवलकर ने यह भी लिखा कि टावर की नींव की खुदाई पूरी होने के बाद उसमे कांक्रीटिंग का काम भी भी काफी हो चुका है । अब उसमे खुदाई होना ही नही है ऐसे में किले की दीवारों को किसी तरह के नुकसान की कोई संभावना ही नही है । इतना ही नहीं यह काम दीवार से तीन मीटर की दूरी से किया जा रहा है यानी दल ने गणना का तकनीकी परीक्षण किए बगैर ही वैकल्पिक स्थान का सुझाव दे दिया ।
सरकार ने बदला फैसला 
श्री शेजवलकर के लगातार प्रयासों से सरकार को आखिरकार अपना फैसला बदलने को मजबूर होना पड़ा।  नगरीय प्रशासन और विकास विभाग के प्रमुख अभियंता एनपी मालवीय ने नगर निगम आयुक्त को एक पत्र लिखकर आदेश दिया कि वे रोप वे के निर्माण का कार्य शीघ्र शुरू करें ।
यह सारी उठापठक हालांकि प्रशासनिक थी लेकिन सियासी गलियारों में इसे सियासी चश्मे से ही देखा जा रहा है । भाजपा इसे जीत के तौर पर ही देख रही है और इसके जरिये साबित करने की कोशिश में है कि भाजपा की सरकार बनी हो  किसी की बजह से हो लेकिन   नीतिगत मुद्दों पर वह कोई समझौता नही करेगी

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