Sunday, January 17, 2021
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फेसलेस असेसमेंट और टैक्सपेयर्स चार्टर लागू, पीएम मोदी ने कहा -टैक्सपेयर्स को डरने की जरूरत नहीं

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को देश के ईमानदार करदाताओं के लिए नया प्लेटफॉर्म ट्रांसपेरेंट टैक्सेशन, ऑनरिंग द ऑनेस्ट (पारदर्शी कराधान-ईमानदार का सम्मान) लॉन्च किया। मोदी ने कहा कि इसमें फेसलेस एसेसमेंट, फेसलेस अपील और टैक्सपेयर चार्टर जैसे बड़े रिफॉर्म्स शामिल हैं। फेसलेस एसेसमेंट और टैक्सपेयर चार्टर आज से ही लागू हो गए हैं। फेसलेस अपील 25 सितंबर यानी दीनदयाल उपाध्याय जन्मदिवस से देशभर में लागू हो जाएगी।

ईमानदार टैक्सपेयर की राष्ट्रनिर्माण में बड़ी भूमिका
इस महत्वपूर्ण तोहफे के लिए टैक्सपेयर्स को बहुत-बहुत बधाई देता हूं और इनकम टैक्स विभाग के अफसरों, कर्मचारियों को शुभकामनाएं देता हूं। बीते 6 साल में हमारा फोकस रहा है, बैंकिंग द अनबैंक, सिक्योरिंग द अनसिक्योर और फंडिंग द अनफंडेड। आज एक नई यात्रा शुरू हो रही है। ऑनरिंग द ऑनेस्ट, ईमानदार का सम्मान। देश का ईमानदार टैक्सपेयर राष्ट्रनिर्माण में बड़ी भूमिका निभाता है। वो आगे बढ़ता है तो देश भी आगे बढ़ता है।

पॉलिसी को पीपुल सेंट्रिक बनाने पर जोर
आज से शुरू हो रहीं नई सुविधाएं देशवासियों के जीवन से सरकार के दखल को कम करने की दिशा में भी एक बड़ा कदम है। आज हर नियम कानून को, हर पॉलिसी को प्रोसेस और पावर सेंट्रिक एप्रोच से निकालकर उसे पीपुल सेंट्रिक और पब्लिक फ्रेंडली बनाने पर जोर दिया जा रहा है। इसके सुखद परिणाम भी देश को मिल रहे हैं। आज हर किसी को ये अहसास हुआ है कि शॉर्ट कट ठीक नहीं है।

1500 से ज्यादा कानून खत्म
एक दौर था जब रिफॉर्म की बड़ी बातें होती थीं, दबाव में लिए गए फैसलों को भी रिफॉर्म कह दिया जाता था। अब ये सोच और अप्रोच बदल गई है। हमारे लिए रिफॉर्म का मतलब है कि ये नीति आधारित हों, टुकड़ों में नहीं हों और एक रिफॉर्म दूसरे रिफॉर्म का आधार बने। ऐसा भी नहीं है कि हम एक बार रिफॉर्म करके रुक गए। बीते कुछ सालों में 1500 से ज्यादा कानूनों को खत्म किया गया है। ईज ऑफ डूइंग में कुछ साल पहले भारत 134 वें नंबर पर था, अब 63वें नंबर पर है। इसके पीछे कई रिफॉर्म्स हैं।

विदेशी निवेशकों का भरोसा बढ़ा
भारत में विदेशी निवेशकों का भरोसा लगातार बढ़ रहा है। कोरोना काल में भी भारत में रिकॉर्ड एफडीआई आना इसी का उदाहरण है। भारत के टैक्स सिस्टम में फंडामेंटल रिफॉर्म की जरूरत इसलिए थी, क्योंकि ये गुलामी के कालखंड में बना और धीरे धीरे इवॉल्व हुआ। आजादी के बाद छोटे-छोटे बदलाव हुए लेकिन, ढांचा वही रहा। नतीजा यह रहा कि ईमानदार टैक्सपेयर्स को भी कटघरे में खड़ा किया जाने लगा।

कुछ लोगों की वजह से ज्यादातर को परेशानी हुई
कुछ मुट्ठीभर लोगों की पहचान के लिए बहुत से लोगों को बेवजह परेशानी से गुजरना पड़ा। टैक्सपेयर्स की संख्या में बढ़ोतरी होनी चाहिए थी, लेकिन गठजोड़ की व्यवस्था ने ईमानदारी से व्यापार करने वालों को, युवा शक्ति की उम्मीदों को कुचलने का काम किया। जहां कॉम्प्लेक्सिबिटी होती है वहां, कम्प्लायंस भी बहुत कम होता है।

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