Friday, January 22, 2021
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दर्द:पिता ने 9 पेज का बयान जारी किया, लिखा- बदमाशों के झुंड से घिरा था सुशांत

अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत के करीब 2 महीने बाद उनके परिवार ने पहली बार 9 पेज का बयान जारी किया है। इसमें कहा गया कि सुशांत के परिवार को सबक सिखाने की धमकियां दी जा रही हैं। एक-एक करके सबके चरित्र पर कीचड़ उछाली जा रही है। इसके अलावा सुशांत के परिवार ने रिया चक्रवर्ती और मुंबई पुलिस पर भी आरोप लगाए हैं। यह पत्र उनके पिता की तरफ से लिखा गया है।

सुशांत के परिवार ने फिराक जलालपुरी के एक शेर से पत्र की शुरुआत करते हुए लिखा है..‘तू इधर-उधर की न बात कर ये बता कि काफिला क्यों लुटा, मुझे रहजनों से गिला नहीं तेरी रहबरी का सवाल है।’

पत्र में परिवार की 5 बड़ी बातें

  • कुछ साल पहले की ही बात है। न कोई सुशांत को जानता था, न उसके परिवार को। आज सुशांत की हत्या को लेकर करोड़ों लोग व्यथित हैं और सुशांत के परिवार पर चौतरफा हमला हो रहा है। अखबार पर अपना नाम चमकाने की गरज से कई फर्जी दोस्त, भाई, मामा बन अपनी-अपनी हांक रहे हैं। ऐसे में बताना जरूरी हो गया कि आखिर ‘सुशांत का परिवार’ होने का मतलब क्या है?
  • सुशांत को ठगों-बदमाशों लालचियों का झुंड घेर लेता है। जिन पर सुशांत की सुरक्षा की जिम्मेदारी थी, वे लोग खुद उसके मृत शरीर की फोटो वायरल करके उसकी प्रदर्शनी लगा रहे थे। उनकी लापरवाही से सुशांत मरा। इतने से मन नहीं भरा तो उसकी मानसिक बीमारी की कहानी चलाकर उसके चरित्र को मारने में जुट जाते हैं।
  • तमाशा करने वाले और तमाशा देखने वाले ये न भूलें कि वे भी यहीं हैं। अगर यही आलम रहा तो क्या गारंटी है कि कल उनके साथ ऐसा ही नहीं होगा?
  • सुशांत के परिवार का सब्र का बांध तब टूटा जब महीना बीतते-बीतते महंगे वकील और नामी पीआर एजेंसी से लैस ‘हनी ट्रैप’ गैंग डंके की चोट पर वापस लौटता है। सुशांत को लूटने-मारने से तसल्ली नहीं हुई।
  • अंग्रेजों के वारिस हैं, एक अदना हिंदुस्तानी मरे, इन्हें क्यों परवाह हो? पीड़ित से कुछ मिलना नहीं, सो मुलजिम की तरफ हो लेते हैं। पिता ने आरोप लगाया कि अंग्रेजों के एक और बड़े वारिस तो जलियांवाला-फेम जनरल डायर को भी मात दे देते हैं। सुशांत के परिवार को कहते हैं कि तुम्हारा बच्चा पागल था, सुसाइड कर सकता था।

‘सवाल सुशांत की हत्या का है’
सुशांत के पिता ने आगे लिखा है, ‘‘सवाल सुशांत की निर्मम हत्या का है। सवाल ये भी है कि क्या महंगे वकील कानूनी पेचीदगियों से न्याय की भी हत्या कर देंगे? इससे भी बड़ा सवाल है कि अपने को एलिट समझने वाले, अंग्रेजियत में डूबे, पीड़ितों को हिकारत से देखने वाले नकली रखवालों पर लोग क्यों भरोसा करें?’’

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