Tuesday, January 19, 2021
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पुत्रों की दीर्घायु के लिए माताओं ने रखा  हर छठ का व्रत

 

भिण्ड। कोरोना काल में आज रविवार का लॉक डाउन होने से बाजार में हलचल कम है पर स्थान-स्थान पर पलाश की टहनी कास और झरिया के साथ प्रतिवर्ष भाद्रपद माह की छठी तिथि को महिलाएं अपने पुत्र के दीर्घायु होने और उन्हें असामयिक मृत्यु से बचाने के लिए हरछठ या हलषष्ठी व्रत रखती हैं। हरछठ हलषष्ठी का अपभ्रंश है हलषष्ठी शब्द हलधर से आया है।भगवान श्री कृष्ण के बड़े भाई  बलराम को हलधर भी कहा जाता है, जिनका आज जन्मदिन भी है । जन्माष्टमी से दो दिन पूर्व बलराम का जन्मदिन होता है। इस व्रत को सभी महिलाएं करती हैं जो पुत्रवती हैं वह भी और गर्भवती व संतान प्राप्ति की इच्छा रखने वाली महिलाएं भी इस व्रत को को करती हैं। मध्य प्रदेश उत्तर प्रदेश के अलावा छत्तीसगढ़ में भी यह व्रत बड़े रूप में मनाया जाता है।

इस दिन महिलाएं ऐसे खेत में पैर नहीं रखतीं, जहां फसल पैदा होनी हो और ना ही पारणा करते समय अनाज व दूध-दही खाती है।  इस दिन हल पूजा का विशेष महत्व है। महिलाएं तालाब में उगे पसही/तिन्नी का चावल या महुए का लाटा बनाकर सेवन करती हैं। बता दें।  इस व्रत का समापन महिलाएं पाड़ा जाई भैंस के दूध से बने दही और महुवा (सूखे फूल) को पलाश के पत्ते पर खाकर करती हैं तो वहीं हरछठ के दिन के बहुत महिलाएं निर्जला व्रत भी रखती हैं । इस व्रत की पारणा  शाम को पसही के चावल या महुए का लाटा बनाकर करने की भी मान्यता है। यह व्रत पुत्रों की दीर्घ आयु और उनकी सम्पन्नता के लिए किया जाता है। इस व्रत में महिलाएं प्रति पुत्र के हिसाब से छह छोटे मिटटी या चीनी के वर्तनों में पांच या सात भुने हुए अनाज या मेवा भरतीं हैं। जारी (छोटी कांटेदार झाड़ी) की एक शाखा ,पलाश की एक शाखा और नारी (एक प्रकार की लता ) की एक शाखा को भूमि या किसी मिटटी भरे गमले में गाड़ कर पूजन किया जाता है। महिलाएं पड़िया वाली भैंस के दूध से बने दही और महुवा (सूखे फूल) को पलाश के पत्ते पर खा कर व्रत का समापन करतीं हैं। उत्तर प्रदेश के कुछ जगहों पर दीवार पर छट माता बना कर भी पूजा की जाती है ।

इन्होंने कहा

हर साल छठ पूजा पर हमें दो दिन पहले से ही पूजन सामग्री इकट्ठी करनी पड़ती है। जिसमें टेसू की टहनियां,कासश की झाड़ियां,सतनजा और झरिया है। तब जाकर छठ के दिन इनकी बिक्री होती है और लोग पूजा के लिए ले जाते हैं।

सत्तार सिंह पूजन सामिग्री बिक्रेता

हर छठ के व्रत में में पेड़ों के फल बिना बोया हुआ अनाज जैसे पसार का चावल आदि खाने का विधान है केवल पढ़ा वाली भैंस का दूध ही लिया जाता है यह पूजन सभी पुत्रवती महिलाएं करती हैं।

श्रीमती नीता त्रिवेदी गृहिणी जो विगत 25 वर्षों से निरंतर इस व्रत को कर रही हैं

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