Monday, October 26, 2020
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रानी का बलिदान देश के लिए सदैव प्रेरणादायी रहेगा

ग्वालियर । भारत में अंग्रेजों के विरुद्ध पहला संगठित स्वतंत्रता संग्राम ई. सन् 1857 में हुआ। इसमें जिन वीरों ने अपने साहस से अंग्रेजी सेनानायकों के दाँत खट्टे किये, उनमें झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई का नाम अत्यंत आदर से लिया जाता है।
*रानी लक्ष्मीबाई मात्र 22 वर्ष और सात महीने ही जीवित रहीं , किन्तु देश की मिट्टी के लिये अपना सर्वस्व न्योछावर कर जो जीवन मूल्य स्थापित किया , वो हम सभी के लिये अनुकरणीय हैं।इन्हीं जीवन मूल्यों की रक्षा के लिये आज भारत-चीन सीमा पर भी हमारे जवानों का बलिदान हुआ है। अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई के बलिदान दिवस पर इन्हें भी विनम्रता पूर्वक श्रद्धांजलि अर्पित करता है। और अपने समस्त कार्यकर्ताओं एवं सर्वसामान्य ग्राहकों से अनुरोध करता है कि अब हमें संकल्पबद्ध होकर अपने क्षुद्र स्वार्थों की तिलांजलि देकर भी चाइना की सम्पूर्ण सामग्री व सेवाओं का बहिष्कार कर हम अच्छे देशभक्त ग्राहक बनेंगे और स्वदेश को आत्मनिर्भर बनाने के लिये प्रयत्नों की पराकाष्ठा करेंगे।
यह बात  अभा ग्राहक पंचायत के राष्ट्रीय संगठन मन्त्री सबनीस ने  रानी लक्ष्मीबाई के  एक वेेबिनॉर को  संबोधित करते हुए कहाकि
. रानी लक्ष्मी बाई की कथा भारत के इतिहास का अविस्मरणीय पृष्ठ है। उन्होंने अपने साहस और देशभक्ति के समन्वय की अमर कहानी भारतीय नारीके लिए लिख दी कि यदि मौका पडे तो वह अपने बच्चे को पीठ पर बाॅध कर भी अकेले पूरी फौज से लड़ने की हिम्मत रखती है। तब भी वह युद्ध भूमि छोडने की जगह बलिदान देना स्वीकार करती है।
उन्होंंने कहाकि  आज के युग में कल्पना चावला (अंतरिक्ष यात्री ) में उनका प्रतिबिम्ब देखते हैं ।ईश्वर से प्रार्थना है कि हम और हमारा समाज उनसे सतत् प्रेरणा लेकर समाज और देश के लिए एक आदर्श प्रस्तुत करते रहें जिससे उनका बलिदान अमर रहे सदा।
अनिला जगत राष्ट्रीय सह सचिव ने कहाकि
1857 के प्रथम स्वतन्त्रता संग्राम की महानायक झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई ने देश की स्वतन्त्रता के लिए अल्पायु में जो त्याग और बलिदान किया वह अत्यन्त प्रेरणास्पद होने के साथ ही अतुलनीय और अविस्मरणीय है, आज उनके बलिदान दिवस पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करने के साथ ही चीन से मातृभूमि की रक्षा हेतु भारत-चीन सीमा पर अपने जीवन का बलिदान देकर वीरगति को प्राप्त होने वाले भारतीय सैनिकों को भी विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ।
अलंकार वशिष्ठ राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य

का कहना है कि ग्वालियर की भूमि पर बलदान हुई वीरांगना लक्ष्मीबाई शस्त्र और शास्त्र विद्या तार्किक बुद्धि,युद्ध कौशल की धनी थी।उनकी युद्ध की क्षमता और समझ ने ब्रिटिश साम्राज्य को भी आश्चर्य चकित किया।अपने अधिकारों के लिए मरते दम तक किस हिम्मत से लड़ा जा सकता है इसका उदाहरण भी शायद दूसरा न मिले।प्रेरणा दायीं था उनका “आत्मविश्वास” और स्वाभिमान से जीना।क्या यह आश्चर्य जनक नही की 1857 के बाद से आज 2020 मे भी हम उन्हें गर्व से याद करते हैं और आज वर्तमान परिस्थिति में उनका जीवन प्रासंगिक है।केवल नारी ही नही अपितु पुरषों की भी प्रेरणा स्त्रोत हैं। क्योंकि उन्होंने युद्ध मे रानी नहीं मर्दानी की भूमिका अदा की।
आज उनके बलिदान दिवस पर उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित करते हैं।वह पहचान है उस वीरता और शौर्य की जो उन्होंने अपनी छोटी सी उम्र में प्राप्त की। धन्य है यह भारत भूमि जहाँ ऐसी वीरांगना ने जन्म लेकर हर भारतवासी को गौरव से भर दिया नमन।
आशा सिंह प्रांतीय महिला जागरण प्रमुख ने कहाकि  महारानी लक्ष्मी बाई वीरों में वीर थी तात्कालिक समय में बड़ी बड़ी शक्तियों ने अंग्रेजों के सामने घुटने टेक दिए थे लेकिन महारानी लक्ष्मीबाई ने अंग्रेजों से मरते दम तक युद्ध लड़ा और जब तक वह जिंदा रही उन्हें अंग्रेजी सेना छू भी ना सकी 1857 में हुए देश के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में महारानी लक्ष्मी बाई जी की महत्वपूर्ण भूमिका रही महारानी लक्ष्मी बाई भारत में महिला सशक्तिकरण का सबसे बड़ा उदाहरण है ऐसी वीरांगना को ह्रदय से नमन है ।
लोकेन्द्र मिश्रा सचिव जिला ग्वालियर ने कहाकि
सर्व प्रथम वीरांगना रानी लक्ष्मी बाई को नमन करती हूं ,मुझे गर्व है कि मुझे उस भूमि पर निवास करने का अवसर प्राप्त हुआ यहां की मिट्टी में रानी लक्ष्मी बाई की बलिदान की सुगंध बिखरी हुई है इस पावन भूमि में महारानी लक्ष्मीबाई ने देश हित के लिए छोटी सी उम्र में अपना सर्वस्व निछावर कर दिया हमें महारानी लक्ष्मी बाई के कृत्यों से प्रेरणा लेनी चाहिए जिन्होंने अपनी मृत देह तक को विधर्मी अंग्रेजो का हाथ नहीं लगने दिया हम भी संकल्प ले की हम विदेशी चीजों को हाथ नहीं लगाएंगे अपनी भारत भूमि में निर्मित वस्तुओं का ही प्रयोग करेंगे , हम रहे या ना रहे यह देश रहना चाहिए यह भाव हर भारतवासी के मन में होना चाहिए राष्ट्रहित सर्वोपरि  है ।

जय ग्राहक जय भारत, नीलम जगदीश गुप्ता जिला सदस्य  ने कहाकि मैं अपनी झांसी नहीं दूंगी। लक्ष्मीबाई का यही हूंकार हम सब भारतीयों के मन में है। हर भारतीय के मन में हृदय में यही ध्वनि गूंज रही है कि हमें अतिक्रमण की हुई भूमि का तिल तिल मुक्त कराना है । इसके लिए चाहे हमें प्राण का बलिदान ही क्यों न देना पड़े । यह संकल्प ही हमारी लक्ष्मीबाई के प्रति श्रद्धांजलि है।
प्रियंका कुशवाह जिला सह संयोजिका महिला इकाई ने कहाकि मैं रहूं या ना रहूं यह देश रहना चाहिए। बुंदेले हरबोलों ने महारानी लक्ष्मीबाई की जिस बलिदान गाथा को गाया ,उस बलिदान की साक्षी भूमि ग्वालियर के वासी होने के नाते आज मैं यह संकल्प लेतीहूं और दुर्गा अवतार बलिदानी लक्ष्मीबाई को यह वचन देती हूं कि देश के लिए अपने प्राण का कतरा कतरा होम करेंगे। भारत माता की जय
वन्दना सैनी  महानगर सचिव भोपाल नेे कहाकि आज महारानी लक्ष्मीबाई की पुन्य तिथि पर उन्हें सादर नमन एवं श्रद्धांजलि है । महारानी लक्ष्मीबाई हमारे देश का गौरव और महिलाओं की प्रेरणा स्रोत हैं। स्वतंत्रता संग्राम की अलख जगाने वाली इस बहादुर, राष्ट्र भक्त योद्धा की वीरता एवं उनका बलिदान युगों-युगों तक आने वाली पीढ़ियां याद रखेंगी ।
मेरा संदेश  है कि इस नई पीढ़ी को कि वो सशक्त बने मानसिक और शारीरिक रूप दोनों से ।
जीवन में हार जीत की परवाह किए बिना अपने लक्ष्य को पाने की कोशिश जरूर करें। सफ़लता निश्चित प्राप्त होगी। सुजाता संग्राम सिंह सदस्य ने सभी सदस्यों ने अपने श्रद्धा सुमन अर्पित किए।

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