Tuesday, October 20, 2020
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मोदी ने बुलाई सर्वदलीय बैठक, हो सकता है बड़ा फैसला

चीन की धोखेबाजी के बाद मोदी सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। पीएम मोदी ने 19 जून को शाम 5 बजे सर्वदलीय बैठक बुलाई है। माना जा रहा है कि सरकार कोई भी कदम उठाने से पहले सभी दलों को विश्वास में लेना चाहती है। साथ ही सीमा पर सैना को अलर्ट कर दिया गया है। इससे पहले रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह व अन्य वरिष्ठ मंत्रियों से मुलाकात के बाद फैसला लिया गया है कि चीन के साथ अभी सैन्य वार्ता नहीं की जाएगी। बीते दिनों सीमा पर तनातनी को कम करने के लिए दोनों देशों ने यह वार्ता शुरू की थी, लेकिन सोमवार रात चीन की हरकत के बाद अब इसे रोक दिया गया है। बता दें भारत और चीन के बीच लद्दाख में जारी तनाव उस समय बढ़ गया जब 14-15 जून की रात चीनी सैनिकों ने गलवन घाटी में भारतीय सैनिकों पर अचानक हमला कर दिया। दोनों देशों के सैनिकों के बीच हुए खूनी संघर्ष में भारत के 20 जवान शहीद हुए हैं, जबकि चीन के 43 सैनिक मारे गए हैं। भारत के चार सैनिकों की हालत गंभीर है। आशंका जताई जा रही है कि शहीदों की संख्या 24 पहुंच सकती है।

समाचार एजेंसी ANI ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि चीन के मारे गए जवानों में उसका कमांडिंग ऑफिसर भी शामिल है। इस तरह चीन को इस बार भारतीय सेना के हाथों में मुंह की खाना पड़ी है।इसके बाद से पूरी दुनिया में भारत चीन के इस तनाव की चर्चा है। दिल्ली में मोदी सरकार एक्शन में हैं। हाईलेवल बैठकों का दौर जारी है और चीन को जवाब देने की रणनीति बनाई जा रही है।

चीन के मुद्दे पर भले ही अमेरिका और कनाडा समेत अन्य देश भारत के साथ खड़े नजर आ रहे हैं, लेकिन देश का प्रमुख विपक्षी दल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सवाल उठा रहा है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने ट्वीट कर पीएम मोदी से पूछा है कि आखिर वे चुप क्यों हैं और क्या छूपा रहे हैं। कांग्रेस का कहना है कि भारतीय सैनिकों की शहादत बहुत ही चौंकाने वाली, डरावनी और अस्वीकार्य स्थिति है। कांग्रेस ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से इस घटना का पूरा ब्योरा मांगा है। उसने इस बारे में देश को विश्वास में लेने को कहा है। साथ ही जमीनी हालात की जानकारी सभी राजनीतिक दलों के नेतृत्व को देने की मांग की है। कांग्रेस के प्रमुख प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री ने भारतीय क्षेत्र में चीन के कब्जे की बात पर अब तक चुप्पी साध रखी है। उन्होंने कहा कि भारत के सुरक्षा और क्षेत्रीय अखंडता से कोई समझौता नहीं किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि लद्दाख के गलवन और पैंगोंग त्सो झील क्षेत्र में चीन के आक्रामक रवैये पर भी उन्होंने मौन रखा है।

दूसरी ओर, महाराष्ट्र में कांग्रेस की सहयोगी शिवसेना ने पूर्वी लद्दाख में भारतीय और चीनी सेना के बीच हिसक झड़प पर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। साथ ही कहा कि केंद्र सरकार को निर्वाचित विपक्ष को विश्वास में लेना चाहिए। शिवसेना की उपनेता प्रियंका चतुर्वेदी ने ट्वीट किया कि सरकार को मीडिया के जरिये अपना प्रचार नहीं करना चाहिए। भारत सरकार अपने हितों को देख रही है, लेकिन हम स्पष्टता चाहते हैं। देश आपके साथ है लेकिन उन्हें भी जानने का हक है।

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