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कैलाश विजयवर्गीय के बयान से खड़ा हुआ राजनीतिक तूफान

कैलाश विजयवर्गीय के बयान से खड़ा हुआ राजनीतिक तूफान

देशभर में मदरसों को मिलने वाली सरकारी मदद के औचित्य पर सवाल उठाकर भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने नया राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया है। विजयवर्गीय ने एक ट्वीट कर संविधान के अनुच्छेद 30 पर सवाल उठाते हुए कहा कि धर्म निरपेक्ष राष्ट्र में अल्पसंख्यक वर्ग को धार्मिक प्रचार-प्रसार और धार्मिक शिक्षा (मदरसे) की अनुमति से समानता के अधिकारों का हनन होता है। उन्होंने ट्वीट के जरिए परोक्ष रूप से मुद्दा उठाया कि अनुच्छेद 30 की आड़ में देश के बहुसंख्यक समाज के साथ धार्मिक भेदभाव क्यों किया जा रहा है। विजयवर्गीय के ट्वीट को एक तरह से अनुच्छेद 30 हटाओ मुहिम का ही हिस्सा माना जा रहा है।

उन्होंने कहा कि देश में संवैधानिक समानता के अधिकार को ‘आर्टिकल 30’ सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचा रहा है। ये अल्पसंख्यकों को धार्मिक प्रचार और धर्म शिक्षा की इजाजत देता है, जो दूसरे धर्मों को नहीं मिलती। जब हमारा देश धर्मनिरपेक्षता का पक्षधर है तो ‘आर्टिकल 30′ की क्या जरुरत।’

देश में संवैधानिक समानता के अधिकार को ‘आर्टिकल 30’ सबसे ज्यादा नुकसान पहुँचा रहा है। ये अल्पसंख्यकों को धार्मिक प्रचार और धर्म शिक्षा की इजाजत देता है, जो दूसरे धर्मों को नहीं मिलती। जब हमारा देश धर्मनिरपेक्षता का पक्षधर है, तो ‘आर्टिकल 30’ की क्या

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