Tuesday, October 27, 2020
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सिंधिया के खिलाफ पोस्टर विवाद मैं कौन कितना फायदे में रहा ?

 

ग्वालियर। रविवार को सिंधिया के महल जय विलास पैलेस के बार चार पोस्टर चिपकाकर और सिंधिया समर्थको द्वारा मामले को पुलिस को सौंपकर कांग्रेस ने अनचाहे ही फायदा बटोर लिया। इसके बाद यह खबर प्रदेश  राष्ट्रीय  मीडिया पर छा  गयी और फिर सिंधिया और उनके समर्थको का दल – बदल एक बार फिर चर्चा में आ गया। 
रविवार को कांग्रेस के एक प्रवक्ता सिद्धार्थ सिंह राजावत ने जय विलास परिसर के बाहर कुछ पोस्टर  चिपकाते हुए अपने वीडियो और फोटो स्वयं वायरल किये थे। इसमें नए – नए भाजपाई बने पूर्व सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया के फोटो के नीचे कहा गया था कि कांग्रेस में रहते हुए जनता की समस्याओं के खिलाफ सड़क पर उतरने की धमकी देने वाले सिंधिया अब जब करोड़ों जनता सड़कों पर नंगे पांव भटक रही है ऐसे में अब वे सड़क पर क्यों नहीं उतर रहे और लापता है। कांग्रेस नेता ने उनका पता बताने वाले को नकद इनाम की भी घोषणा की थी वह भी महज इक्यावन सौ रुपये।
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कुछ घंटे तक तो इस वायरल वीडियो को न मीडिया ने तबज्जो दी और न ही लोगों ने नोटिस में लिया क्योंकि आजकल ऐसे पोस्टर युद्ध प्रदेश  भर में चल रहा है लेकिन कुछ घंटे बाद माज़रा एकदम बदल गया। कुछ सिंधिया समर्थकों ने पोस्टर फाड़ने के फोटो डाले और थाने पर जमा होकर शिकायत की। इसके बाद उन्होंने भाजपा के जिला अध्यक्ष कमल माखीजानी को भी बुला लिया।  सबने मिलाकर शिकायत की और पुलिस ने एफआयआर करके कांग्रेस नेता को गिरफ्तार कर लिया।  इसके बाद यह मामला प्रादेशिक और राष्ट्रीय मीडिया पर छा   गया और सिंधिया का साथियो सहित दल बदल से जुड़े किस्से सियासी गलियारों में फिर से ताज़ा होने लगे।
नहीं पहुंचा कोई पूर्व विधायक 
इस मामले  में एक और बात चौंकाने वाली यह रही कि सिंधिया समर्थकों ने झांसी रोड थाने में शिकायत दर्ज कराई और फिर इकट्ठे होकर एडिशनल एसपी सतेंद्र तोमर से भी मिले लेकिन इस पूरी कार्यवाही के दौरान जिले में सिंधिया समर्थक तीन पूर्व विधायकों प्रधुम्न सिंह तोमर,श्रीमती इमरती देवी सुमन और मुन्ना लाल गोयल में से एक भी न तो एडिशनल एसपी दफ्तर पहुंचे और न ही झांसी रोड थाने पर।  इनकी नामौजूदगी कार्यकर्ताओं में चर्चा का विषय बन गयी।
सिंधिया समर्थक एकजुट तो कोंग्रेसी बिखरे रहे 
 इस घटनाक्रम में एक ख़ास बात यह रही कि इस घटनाक्रम के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थक एकजुट नज़र आये. इस मामले की खबर लगते ही वे एकजुट होने लगे और थाने पहुंचे लेकिन जब पुलिस ने कार्यवाही नहीं की तो भाजपा जिला अध्यक्ष को लेकर एडिशन एसपी से मिले और तब तक डंटे रहे जब तक एफआईआर करवा नहीं ली।  इससे उलट कांग्रेस कार्यकताओं में न तो इस मामले में ततपरता दिखी और न ही एकजुटता। काफी देर  बाद कांग्रेस के जिला अध्यक्ष डॉ देवेंद्र शर्मा ने एसपी से भेंट कर ज्ञापन सौंपा और मामला वापिस  लेने की मांग की जबकि तब तक पुलिस कांग्रेस नेता को थाने में बिठा चुकी थी लेकिन वहां गिरफ्तारी का विरोध करने कोई कोंग्रेसी कार्यकर्ता नहीं पहुंचा।

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