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उपेक्षित कार्यकर्ता को मान और पार्टी को संगठन देना ही मेरा लक्ष्य

उपेक्षित कार्यकर्ता को मान और पार्टी को संगठन देना ही मेरा लक्ष्य

वर्षों से उपेक्षित किये गए कार्यकर्ताओ को मान देना और संगठन को फिर खड़ा करना मेरी पहली प्राथमिकता 

विशेष संवाददाता-
ग्वालियर । ग्वालियर जिला कांग्रेस कमेटी ग्रामीण के नव नियुक्त जिला अध्यक्ष अशोक सिंह का मानना है कि वरिष्ठ नेताओं ने उन्हें यह जिम्मा सौंपा ही इसलिए है क्योंकि वह चुनौती भरा है ।
कई दशकों से ग्रामीण क्षेत्र में संगठन को पंगु बना दिया गया था । व्यक्ति में आस्था वाले लोग ही सरसब्ज होते थे और कांग्रेस में आस्था रखने वाले दमन का शिकार होते थे । अब सच्चे कांग्रेसियों को मान सम्मान देकर संगठन को मजबूत करना ही उनकी पहली प्राथमिकता होगी । 
श्री सिंह ने “इंडिया शाम तक” से बातचीत में कहाकि वे खांटी कांग्रेस परिवार के है । उनके परिवार ने आज़ादी की लड़ाई में भूमिका निभाई और सदैव कांग्रेस के साथ रहने का निर्णय लिया इसलिए परिवार ने खोया बहुत लेकिन कांग्रेसी परिवार की जो पहचान पाई वही मेरी अमानत है ।
क्या यह पद आपके कद के अनुरूप है ? इस पर श्री सिंह ने कहाकि वे कांग्रेस के सिपाही है । पद उनके लिए प्रतिष्ठा नही बल्कि जिम्मेदारी होती है जब पीसीसी अध्यक्ष पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ ने फोन करके मुझसे कहाकि मैं  आपको ये जिम्मेदारी सौंप रहा हूँ कि आप खत्म कर दी गई कांग्रेस को फिर से महात्मा गांधी की कांग्रेस की शक्ल दो तो मैंने उसे सिर माथे लिया । हालांकि उन्होंने कहाकि में प्रदेश उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी बरकरार रहेगी।
क्या आपकी नियुक्ति के पीछे उप चुनाव है ? निसंदेह वह भी एक बजह रही है । चूंकि मेरा परिवार किसान परिवार है इसलिए मेरे परिवार का ज्यादा संपर्क गाँव से है । मेरे पिता ग्रामीण और शहरी मिलीजुली प्रभाव वाली मुरार विधानसभा क्षेत्र से विधायक भी रहै और मन्त्री भी । उंन्होने ग्रामीण क्षेत्र में सड़कों का जाल बिछाया । मैने भी चार बार लोकसभा का चुनाव लड़ा । सब जानते है कि मुझे भाजपा के साथ कांग्रेस के भी एक प्रभावशाली धड़े से लड़ना पड़ता था जो अब बेनकाब भी हो गया । बावजूद मुझे व्यापक जन समर्थन मिला । तीन चुनावो में तो मैं महज कुछ हजार मतों से पराजित हुआ । इस दौरान मुझे ग्रामीण क्षेत्रों में व्यापक जीत मिली । इसलिए ही पार्टी ने मुझे यह जिम्मा सौंपा क्योंकि डबरा में उप चुनाव में पार्टी के खिलाफ सौदेवाजी करने वालो को सबक सिखाने के लिए जनता और कार्यकर्ता आतुर बैठा है ।
तो क्या आप सिर्फ डबरा तक सीमित रहेंगे?
        ऐसे यह तय करना पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का काम है कि किसको कहाँ लगाएं? लेकिन अभी तक जो तय हुआ है मैं अपने संसदीय क्षेत्र की तीनों सीटों डबरा,करैरा और पोहरी पर ध्यान केंद्रित कर रहा हूँ । यहां धोखेबाज विधायको के खिलाफ जनता बहुत नाराज है और वह उन्हें सबक सिखाना चाहती है ।
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