Tuesday, October 27, 2020
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डॉ गोविन्द सिंह संभाल सकते हैं नेता प्रतिपक्ष की कुर्सी 

ग्वालियर। भाजपा की तिकड़म में फंसकर अपनी सत्ता गंवा बैठी कांग्रेस एक पखबाड़ा बीत जाने के बावजूद अभी तक अपना नेता प्रतिपक्ष का नाम भी तय नहीं कर पायी है। इस कुर्सी के लिए भी पार्टी में फिलवक्त एक राय नहीं है। पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ चाहते है कि नेता प्रतिपक्ष का चयन जल्द से जल्द हो जाए।
सूतो की मानें तो इस पद के लिए सबसे प्रबल तीन दाबेदार माने जा रहे हैं। एक बाला बच्चन,दूसरे सज्जन सिंह वर्मा और तीसरे डॉ गोविन्द सिंह। इनमें से पहले दो पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ खेमे के हैं जबकि डॉ सिंह दिग्विजय गुट से ताल्लुकात रखते है।
बाला बच्चन इस पद के लिए अपनी गोटियां बिछा रहे हैं।  वे अपने दावे के समर्थन में तर्क देते हैं कि वे नब्बे के दशक से सदन के सदस्य तो हैं ही प्रदेश में मंत्री भी रह चुके  हैं। भाजपा के बीते कार्यकाल में वे उप नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी भी संभाल चुके थे। तब नेता प्रतिपक्ष सत्यदेव कटारे थे। जब श्री  निधन हो गया तो कुछ महीनो तक वे ही नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी संभालते रहे।   लेकिन उनकी   दिक्कत ये है कि   प्रदेश के क्षेत्र विशेष से बाहर उनकी कोई पहचान नहीं है।
इस   सशक्त दाबेदार सज्जन सिंह वर्मा माने जा रहे हैं।  वे भी पुराने विधायक हैं और कई दफा मंत्री रह चुके हैं।  उन्हें भी पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ खेमे का माना जाता है। लेकिन उनके नाम में गुटबाजी आड़े आ रही है।  वे वरिष्ठ नेता  विरोधी माने जाते हैं मंत्री रहते भी वे श्री सिंह पर निशाना साधते रहते थे ऐसे में दिग्विजय समर्थक उनके नाम पर सहमत होंगे यह असंभव सा ही है।
अब एक तीसरा नाम पूर्व सहकारिता  मंत्री डॉ गोविन्द सिंह का नाम है। उनके पक्ष में कई बातें है।  पहली तो यह कि वे कांग्रेस के इकलौते ऐसे विधायक है जो 1990 से निर्बाध रूप से हर हवा में चुनाव जीतते आ रहे हैं। दूसरा वे अनेक बार मंत्री रहने के अलावा कमलनाथ सरकार में संसदीय कार्य मंत्री का दायित्व भी संभल रहे थे।  उन्हें संसदीय नियमो का जानकार माना जाता है। तीसरे वे दिग्विजय समर्थक है लेकिन कमलनाथ और उनके समर्थकों से भी उनके बेहतर तालमेल है यद्यपि वे भाजपा में जा चुके ज्योतिरादित्य सिंधिया के मुखर विरोधी माने जाते है लेकिन अब सिंधिया पार्टी छोड़ चुके जो उनके मार्ग में रोड़ा बन जाते थे।
सूत्रों की मानें तो डॉ सिंह के पक्ष में तीसरी और बड़ी बजह राजनीतिक है।  यदि कमलनाथ कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी संभालते रहते है , जैसे कि संकेत भी मिल रहे हैं तो सियासी संतुलन के चलते उनके समर्थक को ही नेता  बनाया जाएगा।  डॉ साहब का नाम सबसे सशक्त होकर उभरता है।  इधर जिन 24 विधानसभा क्षेत्रो में उप चुनाव होने है उनमे से सर्वाधिक ग्वालियर – चम्बल संभाग में ही होना हैं और अब इन चुनावों में प्रचार अभियान का दारोमदार डॉ गोविन्द सिंह,एपेक्स के पूर्व प्रशासक अशोक सिंह और प्रदेश कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष राम निवास रावत के कंधो पर ही रहना है।

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