Wednesday, October 21, 2020
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संजू बने सरकार के संकटमोचक,रुतबा बढ़ा

भोपाल । कमलनाथ सरकार फिलहाल सियासी संकट से उबरती नज़र आ रही है । एक सप्ताह चले प्रदेश के इस सियासी ड्रामे में ऑपरेशन लोटस की दम निकलती नज़र आ रही है लेकिन इसमें कांग्रेस के अनेक नेताओ की साख कम हुई जबकि एक विधायक का रुतबा बढ़ गया । इस विधायक का नाम है – संजीव सिंह कुशवाह संजू ।
भिण्ड विधानसभा से बहुजन समाज पार्टी के विधायक इस ऑपरेशन कमल के खिलाफ मुख्यमंत्री कमलनाथ की सरकार के संकटमोचक बनकर उभरे क्योंकि जब या ऑपरेशन अपनी सफलता के लगभग करीब पहुंचने वाला ही था तब संजू पहले विधायक थे जो खुलकर कमलनाथ सरकार के समर्थन में मीडिया के सामने आया ।
सूत्रों की माने तो कांग्रेस के एक दर्जन विधायक इस ऑपरेशन में शामिल हो चुके थे । जिसमें एक निर्दलीय भी शामिल था । ऑपरेशन के एक किरदार  सपा और बसपा के विधायकों से भी संपर्क में थे । सभी विधायकों को दिल्ली में इकट्ठा किया गया था । जब इनको गुरुग्राम के एक होटल में शिफ्ट होने की बात आई तो संजू ने इनकार कर दिया । उनके साथ छतरपुर जिले के समाजवादी पार्टी के इकलौते विधायक भी थे । बाद में चार विधायको को बेंगलुरु शिफ्ट कर दिया । लेकिन इससे पहले आधी रात को दिग्विजय सिंह और कमलनाथ ने मिलकर इस अभियान में सेंध लगा दी । प्रदेश सरकार के दो मंत्रियों – जयवर्धन सिंह और जीतू पटवारी ने होटल पहुंचकर दबाव बनाया और वहां से बसपा विधायक रामबाई को अपने साथ ले आये । ये ऑपरेशन को बड़ा झटका था । ऑपरेशन तभी सफल हो सकता था जब एक दर्जन विधायक एक साथ सरकार के खिलाफ आये ।
      ऑपरेशन लोटस को दूसरा और सबसे बड़ा झटका दिया बसपा के युवा विधायक संजीव सिंह संजू ने जब उसी रात उन्होंने मीडिया से कहा दिया – वे कमलनाथ सरकार के साथ थे और रहेंगे भी । उनके साथ सपा विधायक चतुर्वेदी भी थे । इसके बाद ऑपरेशन लोटस की दम निकल चुकी थी ।
हालांकि संजू इसके बाद हुई बयानवाजी से नाराज थे । उन्होंने अपनी नाराजी मीडिया में भी जताई और सीएम को भी बताई । वे गुस्सा इस बात से थे कि मंत्रियों और दिग्विजय सिंह ने ऐसे पीठ थपथपाई मानो वे हमें आज़ाद कराके लाये जबकि वे तो खुल्ला घूम रहे थे । बाद में डेमेज कंट्रोल करते हुए दिग्विजय सिंह ने स्पष्ट भी किया कि होटल में संजू और चतुर्वेदी नही थे ।
संजू ने बदले में मांगा जैन समाज का काम
सूत्रों की माने तो चार्टर्ड प्लेन से भोपाल पहुंचकर जब संजू मुख्यमंत्री से मिले तो उन्होंने संजू के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित की और पूछा बताओ हम क्या कर सकते है तो बदले में संजू ने अपना कोई व्यक्तिगत काम न बताते हुए कहाकि वे उनके क्षेत्र के काम कर दें । उन्होंने कहाकि तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रकाश चंद सेठी ने जैन समाज के कीर्ति स्तम्भ का शिलान्यास किया था । इस जमीन पर जैन समाज के आयोजन भी होते है और भावनात्मक लगाव भी है लेकिन जमीन की लीज अभी तक नही हुई है । कमलनाथ ने तत्काल अफसरों को बुलाया । केबिनेट के एजेंडे में शामिल करने के निर्देश दिए और दूसरे ही दिन कीर्ति स्तम्भ की जमीन महज एक रुपये के टोकन लीजरेंट पर भिण्ड के जैन समाज को देने की सहमति हो गई । इस मौके का फायदा संजू ने जैन समाज के हित में उठा लिया जबकि जैन समाज पचास सालों से इस जमीन की लीज के लिए संघर्ष कर रहा था ।
सूत्रों के अनुसार इस एपिसोड के बाद सरकार में संजू का परोक्ष ही सही रुतबा और बढ़ेगा । इसकी वजह ये है कि वे सबसे पहले खुलकर कमलनाथ के समर्थन में मीडिया में आये थे ।

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