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जस्टिस अरुण मिश्रा ने वकील सिंघवी से कहा- जजों को विवादों में न घसीटा जाए

जस्टिस अरुण मिश्रा ने वकील सिंघवी से कहा- जजों को विवादों में न घसीटा जाए

नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अरुण मिश्रा ने कहा है कि जजों को विवादों में न घसीटा जाए। उन्होंने पिछले दिनों इंटरनेशनल ज्यूडीशियल कॉन्फ्रेंस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ की थी। इसके बाद विपक्ष ने इस पर सवाल उठाए थे। शुक्रवार को जस्टिस मिश्रा की अध्यक्षता में दो जजों की बेंच दिल्ली के खान मार्केट में एक प्ले स्कूल को सील करने के मुद्दे पर सुनवाई कर रही थी। वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने स्कूल प्रबंधन की ओर से दलीलें पेश कीं। लेकिन सुप्रीम कोर्ट इससे सहमत नहीं हुआ और सीलिंग के आदेश पर रोक लगाने की याचिका खारिज कर दी।सिंघवी ने सुनवाई के दौरान जस्टिस मिश्रा और जस्टिस दीपक गुप्ता की बेंच से कहा कि प्ले स्कूल लुटियंस जोन में खान मार्केट के दूसरी तरफ है। जो तीन साल से चल रहा है और लुटियंस में रहने वाले कई नौकरीपेशा लोगों के बच्चे पढ़ाई करते हैं। इसलिए इसे सील करने का कोई तुक नहीं बनता है।जस्टिस मिश्रा ने सिंघवी से पूछा- क्या आप भी खान मार्केट के पास रहते हैं, कई समृद्ध लोग वहां रहते हैं। इस पर सिंघवी बोले- मैंने 30 साल पहले ही लुटियंस छोड़ दिया था, लेकिन यह अच्छी जगह है। वहां कई अच्छी कॉफी शॉप हैं। भारत आजाद देश है, इसलिए मैं भी खान मार्केट को अच्छा मानता हूं। मैंने कई जजों को इसी मार्केट में शॉपिंग करते देखा है।

‘किसी की तारीफ करने को अच्छा भावना के तौर पर लें’
इस पर जस्टिस मिश्रा ने कहा- ”जजों को विवादों में न घसीटा जाए। मैं आपके (सिंघवी) लिए भी कुछ अच्छे शब्द बोल सकता हूं। लेकिन फिर दूसरे लोगों को परेशानी होने लगेगी और वे आरोप लगाना शुरू कर देंगे। किसी की तारीफ करने कोे अच्छी भावना के तौर पर लिया जाए।”

जस्टिस मिश्रा ने कहा था- प्रधानमंत्री मोदी दूरदर्शी व्यक्ति 
22 फरवरी को जस्टिस मिश्रा ने कहा था- अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने नेतृत्व के लिए तारीफ हासिल करने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दूरदर्शी व्यक्ति हैं। उनके अगुआई में भारत दुनिया में एक जिम्मेदार और दोस्ताना रुख रखने वाला देश बनकर उभरा है। न्यायिक प्रक्रिया को मजबूत करना समय की मांग है, क्योंकि यह लोकतंत्र की रीढ़ है। विधायिका इसका दिल है और कार्यपालिका दिमाग है। इन सभी अंगों को स्वतंत्र रूप से काम करना होता है। लेकिन, इनके आपसी तालमेल से ही लोकतंत्र कामयाब होता है।

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