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शिवसेना ने केंद्र पर निशाना साधा, सामना में पूछा- जब दंगे हो रहे थे तब अमित शाह कहां थे?

शिवसेना ने केंद्र पर निशाना साधा, सामना में पूछा- जब दंगे हो रहे थे तब अमित शाह कहां थे?

मुंबई. देश की राजधानी दिल्ली में हुई हिंसा को लेकर शिवसेना ने पार्टी के मुखपत्र ‘सामना’ में केंद्र सरकार और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह पर निशाना साधा है। पार्टी की शुक्रवार की संपादकीय में पूछा है कि जब दिल्ली में दंगे हो रहे थे तो शाह कहां थे? क्या कर रहे थे? उधर, पार्टी प्रवक्ता और राज्यसभा सांसद संजय राउत अयोध्या दौरे पर हैं। वहां मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि अब धार्मिक भावनाओं को जगाकर चुनाव नहीं जीता जा सकता है।

‘दिल्ली में लोग मर रहे थे, अहमदाबाद में मोदी ‘नमस्ते ट्रंप’ कह रहे थे’
संपादकीय में प्रधानमंत्री के तीन दिन बाद शांति के आह्वान पर भी सवाल उठाया है। शिवसेना ने लिखा है,’देश की राजधानी में 37 लोग मारे गए उनमें पुलिसकर्मी भी हैं तथा केंद्र का आधा मंत्रिमंडल उस समय अहमदाबाद में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप को सिर्फ ‘नमस्ते, नमस्ते साहेब’ कहने के लिए गया था।’

सामना में आगे लिखा- भाजपा सत्ता में है और विपक्ष कमजोर है

  • ‘केंद्र में कांग्रेस या दूसरे गठबंधन की सरकार होती और विपक्ष में भाजपा होती तो दंगों के लिए गृहमंत्री का इस्तीफा मांगा गया होता। गृहमंत्री के इस्तीफे के लिए दिल्ली में मोर्चा व घेराव होता। गृहमंत्री को नाकाम ठहराकर ‘इस्तीफा चाहिए’ ऐसी मांग की गई होती, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा क्योंकि भाजपा सत्ता में है और विपक्ष कमजोर है।’
  • ‘गृहमंत्री और उनके सहयोगी अहमदाबाद में थे, उसी समय गृहविभाग के एक गुप्तचर अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या दंगों में हो गई। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोवाल चौथे दिन अपने सहयोगियों के साथ दिल्ली की सड़कों पर लोगों से चर्चा करते दिखे, इससे क्या होगा? जो होना था वो नुकसान पहले ही हो चुका है।’
  •  ‘सवाल ये है कि इस दौर में हमारे गृहमंत्री का दर्शन क्यों नहीं हुआ? देश को मजबूत गृहमंत्री मिला है लेकिन वे दिखे नहीं, इस पर हैरानी होती है। विधानसभा चुनाव में अमित शाह गृहमंत्री होते हुए भी घर-घर प्रचार का पर्चा बांटते घूम रहे थे तथा इसके लिए उन्होंने समय निकाला। परंतु जब पूरी दिल्ली हिंसा की आग में जल रही थी तब यही गृहमंत्री कहीं दिखाई नहीं दिए।’

जस्टिस के ट्रांसफर पर उठाए सवाल
संपादकीय में दिल्ली हाईकोर्ट के जस्टिस मुरलीधर के ट्रांसफर का मुद्दा उठाते हुए लिखा, ”दिल्ली में 1984 के दंगों की तरह भयंकर हालात न बने, सभी नागरिकों को जेड सुरक्षा देने का वक्त आ गया है। ऐसी टिप्पणी जस्टिस मुरलीधर ने की और अगले 24 घंटों में उनका तबादले का आदेश राष्ट्रपति भवन से निकल गया। उन्हें भी सच बोलने की सजा मिलने लगी है क्या?”

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