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मोंटेक सिंह अहलूवालिया ने कहा, पीपीपी मॉडल में पारदर्शिता की जरूरत

मोंटेक सिंह अहलूवालिया ने कहा, पीपीपी मॉडल में पारदर्शिता की जरूरत

भोपाल। भोपाल के मिंटो हॉल में सीएम कमलनाथ और योजना आयोग के पूर्व अध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया ने ऑल्टरनेट प्रोजेक्ट फाइनेंसिंग वर्कशॉप का शुभारंभ किया। मोंटेक सिंह अहलूवालिया ने कहा कि आज निवेश के लिए वैकल्प‍िक रास्ते ढूंढने की जरूरत है। कई देशों में पीपीपी मॉडल अपनाकर कई देशों में बेहतर काम हुआ, लेकिन इसके फायदे के साथ कुछ परेशानियां भी हैं। पीपीपी मॉडल में पारदर्शिता की जरूरत है। सरकार के पास सीमित संसाधन होते हैं। सरकार को बजट से कई सारे काम करना होते हैं, लेकिन हर काम बजट से नहीं किया जा सकता है तो पीपीपी की अवधारणा सामने आई। मध्य प्रदेश को वन क्षेत्र का लाभ मिल सकता है। प्राइवेट सेक्टर में बहुत से मौके हैं। अहलूवालिया ने कहा कि एफआरबीएम पर दोबारा सोचने की जरूरत है।

सीएम कमलनाथ ने कहा कि हमें वित्तीय प्रबंधन के लिए ऑउट ऑफ बॉक्स जाकर सोचना होगा, हमारे परंपरागत तौर तरीकों को बदलना होगा। हमारे पास जमीन है हम उसका उपयोग कैसे कर सकते हैं। उद्यानिकी के क्षेत्र में हम सबसे बेहतर कर सकते हैं, इस मामले में हम देश में मध्य प्रदेश का नाम सबसे ऊपर कर सकते हैं। मध्य प्रदेश के वित्तमंत्री ने कहा कि तरुण भनोत ने कहा कि हमने वैकल्पिक आय के स्रोतों के मद्देनजर रेत नीति में बदलाव किया। सड़क निर्माण के लिए सिर्फ बजट के माध्यम से ही नहीं बल्कि पीपीपी मॉडल से भी राशि जुटाई जा रही है। कार्यशाला में जो सुझाव आएंगे सरकार उन पर अमल करेगी।

इस वर्कशॉप में विकास परियोजनाओं के लिए बजट के परंपरागत स्रोतों पर निर्भरता कम कर वैकल्पिक वित्तीय स्रोत तलाशे जाएंगे। योजनाओं को स्व-वित्त पोषित करने के तरीकों पर भी विचार किया जाएगा। इसमें मोंटेक सिंह अहलूवालिया अपने टिप्स देंगे। मध्य प्रदेश का बजट तैयार करने से पहले मुख्यमंत्री कमलनाथ की पहल पर सरकार उन सभी विकल्पों पर विचार करेगी, जहां से वित्तीय संसाधन जुटाए जा सकते हैं।

 

मुख्यमंत्री कमलनाथ का जोर इस बात पर है कि परंपरागत वित्तीय स्रोतों के अलावा अन्य स्रोतों से भी विभागीय योजनाओं के लिए राजस्व का प्रबंध किया जाए। दरअसल प्रदेश के वित्तीय हालात बहुत अच्छे नहीं हैं, केंद्र सरकार ने केंद्रीय करों और सहायता अनुदान में भी बड़ी कटौती की है। इसके बाद राज्य सरकार के लिए बजट प्रबंधन करना मुश्किल हो रहा है। निर्माण सहित विकास अधिकारियों और सामाजिक क्षेत्र की योजनाओं में धन की कमी आड़े ना आए इसके लिए कमलनाथ सरकार नए वृत्ति स्रोतों की तलाश में लगी है।

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