Wednesday, October 21, 2020
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प्रेम के सिर्फ फूहड़ताभरे इज़हार का उत्सव नही है वेलेंटाइन डे

– विनी वर्मा –
वेलेंटाइन डे की धूम इस समय पूरी दुनिया मे मची हुई है । एक ओर जहां संत वेलेंटाइन के वलिदान को बाज़ार ने अपने अनुकूल ढाल लिया और उसके जरिये अरबों डॉलर के ग्रीटिंग्स, फूल,उपहार आदि बेचने की परंपरा विकसित कर दी । मीडिया के बढ़ते प्रभाव के जरिये बाजारू शक्तियों ने इस दिन का विस्तार कस्बो से लेकर गांव तक फैला दिया । ज्यादा दिन पुरानी बात नही है जब यह शब्द कुछ महानगरों के अंग्रेजीदाँ लोगो की जुबान पर होता था और पेज़ थ्री संस्कृति के युवक – युवतियों के बीच इसे सेलिब्रेट किया जाता था लेकिन आज यह दूरस्थ गाँव – कस्बो तक पहुंच गया है । इसे मनाने वाले इसका उपयोग पूरी फूहड़ता के साथ करते है मानो यह कोई लव बर्ड्स को बहकाने या भटकाने का उत्सव हो । मध्यमवर्गीय युवक युवतियों ने इसके जरिये समाज मे विद्रूपता भरने का काम ही किया है बगैर यह जाने कि आखिर यह वेलेंटाइन डे है क्या ? इसको मनाने की शुरुआत किसने की और क्यों की ?
दरअसल यह प्यार के भोंडे इज़हार का नही बल्कि समाज के सबसे महत्वपूर्ण धुरी विवाह नामक संस्था को बचाने की स्मृति का पर्व है ।
इसकी शुरुआत बारहवीं सदी से हुई मानी जाती हैऔर वेलेंटाइन कोई प्रेमी युगल नही बल्कि अपने जमाने के विख्यात संत थे । फिर सवाल यह कि संत को प्रेम से क्या लेना –  देना ? बस इसी सवाल के जबाव से इसकी महत्ता प्रतिपादित होगी ।

दरअसल 1260 में संकलित की गई ‘ऑरिया ऑफ जैकोबस डी वॉराजिन’ नामक पुस्तक में सेंट वेलेंटाइन का वर्णन मिलता है। इसके अनुसार रोम में तीसरी शताब्दी में सम्राट क्लॉडियस का शासन था। सम्राट का मानना

था कि विवाह करने से पुरुषों की शक्ति और बुद्धि कम होती है। उसने सनक भरी राजआज्ञा जारी की कि उसका कोई सैनिक या अधिकारी विवाह नहीं करेगा। इससे पूरे देश मे युवा परेशान हो गए । वे अपनी मंगेतरो से चोरी छिपे मिलते थे । संतति की समस्या पैदा हो गयी । किसी भी प्रेमी यानी मंगेतर के मिलन की खबर मिलने पर उन्हें कत्ल करा दिया जाता । इस राजाज्ञा से सामाजिक परम्पराए खतरे में पड़ गईं । विवाह नामक संस्था लुप्त होती सी लगी । इस बात की जानकारी संत जी तक पहुंची ।
संत वेलेंटाइन ने इस क्रूर आदेश का विरोध किया।

उन्हीं के आह्वान पर अनेक सैनिकों और अधिकारियों ने विवाह किए। आखिर क्लॉडियस ने 14 फरवरी सन् 269 को संत वेलेंटाइन को फांसी पर चढ़वा दिया। तब से उनकी स्मृति में प्रेम दिवस मनाया जाता है।कहा जाता है कि सेंट वेलेंटाइन ने अपनी मृत्यु के समय जेलर की नेत्रहीन बेटी जैकोबस को नेत्रदान किया व जेकोबस को एक पत्र लिखा, जिसमें अंत में उन्होंने लिखा था ‘तुम्हारा वेलेंटाइन’। यह दिन था 14 फरवरी, जिसे बाद में इस संत के नाम से मनाया जाने लगा और वेलेंटाइन-डे के बहाने पूरे विश्व में निःस्वार्थ प्रेम का संदेश फैलाया जाता है।

इस कहानी से साफ है संत ने यह वलिदान किसी उच्चश्रृंखलता के समर्थन के लिए नही बल्कि पारंपरिक सामाजिक संस्था को बचाने के लिए किया था ।

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