Saturday, September 26, 2020
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वेलेंटाइन डे को मैनेजमेंट की स्टूडेंट लेगी साध्वी की दीक्षा

खंडवा के आदिवासी अंचल खालवा में सांसारिक वैभव को छोडकर २७ वर्षीय युवती प्रियंका ‘वसुधैव-कुटुम्बकम’ के मार्ग की पथगामिनी बनते हुए जैन साध्वी की दीक्षा लेने जा रही है.  14 फरवरी को वेलेंटाइन डे के दिन एक प्रेमी अपनी प्रेमिका को पाकर खुद को संसार का सबसे धनी समझता है. उसी वेलेंटाइन डे के दिन प्रियंका भगवान महावीर को अपनाने के लिए साध्वी बनने जा रही है. देखिए एक एम.बी.ए. गर्ल ने किस तरह से सांसारिक बंधनों का त्याग कर साध्वी की राह पकड़ ली.

बग्घी में बैठकर नगर भ्रमण पर निकली यह मुमुक्षु प्रियंका है. मुमुक्षु अर्थात मोक्ष की कामना करने वाली. खालवा की रहने वाली एम.बी.ए. गर्ल प्रियंका भंडारी ने इस सांसारिक जीवन से वैराग्य ले लिया है. मुमुक्षु प्रियंका के पीछे हजारों नगर वासियों का एक लंबा कारवां. पूरे धूम-धाम के साथ दीक्षा से पहले मुमुक्षु प्रियंका का नगर भ्रमण करवाया गया. मोक्ष की राह पर कदम बढ़ा चुकी प्रियंका को आखिरी वार परिवार वालों ने एक दुल्हन की तरह जेवरों से सजाया, हांथों में मेंहदी रचाई ताकि दुल्हन की तरफ बेटी की विदाई की मन के किसी कोने में टिस न रह जाए. लाड़-प्यार और नाजों से पली प्रियंका ने अपने पिता अनिल भंडारी के कारोबार को आगे बढाने के लिए एम.बी.ए. की पढ़ाई पूरी की. मल्टीनेशनल कंपनी से जॉब के ऑफर भी आए लेकिन जैन धर्म के एक स्तवन सुनकर प्रियंका ने अपनी जीवन की दिशा का रुख ही मोड़ दिया. छह माह पूर्व जब प्रियंका ने परिवार वालों को सांसारिक जीवन से वैराग्य लेने की जानकारी दी तब सबके होश उड़ गए. प्रियंका ने 14 फरवरी को वेलेंटाइन डे के दिन दीक्षा लेना सुनिश्चित किया. आखिरकार परिजनों को वह समझाने में कामयाब हो गई. प्रियंका ने कहा वह प्रभु के प्यार में खुद को समर्पित कर रही है.

एक  दिन बाद 14 फरवरी को महाराष्ट्र में कान मुनि महाराज द्वारा दीक्षा विधि सम्पन्न करवाई जायेगी.  ज्यों-ज्यों 14 फरवरी का दिन करीब आ रहा था परिजनों और रिश्तेदारों की भीड़ अपनी लाडली प्रियंका से मिलने उसके घर पर लगने लगी. क्योंकि दीक्षा लेने के बाद प्रियंका दोबारा इस जन्म में अपने घर के आंगन में नही लौटेगी. दीक्षा लेने के लिए महाराष्ट्र रवाना होने से पूर्व प्रियंका को दुल्हन की तरह सजाकर सबने उसपर अपना स्नेह लुटाया. चारों बहनों और रिश्तेदारों ने गीतों के माध्यम से प्रियंका के साथ अपना समय बिताया. दिलपर पत्थर रखकर मां ने भी मंगल गीत गाए और सुख सुविधा और वैभव का त्याग कर वनविहारी होने का आशीर्वाद दिया.

SIGN OFF- भौतिक चकाचौंध से संयमित जीवन में आना वर्तमान दौर में काफी मुश्किल है. प्रियंका का साधु बनने का मार्ग सिर्फ वेश परिवर्तन नही है बल्कि जीवन की दिशा को ही परिवर्तित करना है.

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