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रूस में वायुसेना के 4 पायलटों की ट्रेनिंग शुरू

रूस में वायुसेना के 4 पायलटों की ट्रेनिंग शुरू

बेंगलुरू. देश के महत्वपूर्ण अंतरिक्ष मिशन ‘गगनयान’ के लिए वायुसेना के चार पायलटों का रूस में ट्रेनिंग शुरू हो गई। सोमवार से शुरू हुआ यह प्रशिक्षण एक साल तक चलेगा। इसरो के एक अधिकारी ने मंगलवार को कहा, “चारों पायलट बायोमेडिकल, फिजिकल प्रैक्टिसेस, सोयूज मैन्ड स्पेसशिप (मॉड्यूल) की जानकारी हासिल करेंगे।” रूस भेजने से पहले इसरो ने एक हफ्ते तक पायलटों के लैब इंवेस्टीगेशन्स के साथ फिजिकल स्टेमिना, रेडियोलॉजिकल, क्लीनिकल और साइकॉलजी टेस्ट किए थे।

वायुसेना के पायलटों को ट्रेनिंग के लिए रूस के यूरी ए. गागरिन स्टेट साइंटिफिक रिसर्च एंड टेस्टिंग कॉस्मोनॉट ट्रेनिंग सेंटर भेजा गया है। इसरो के ह्यूमन स्पेसलाइट सेंटर और रूस के स्टेट स्पेस कॉर्पोरेशन रोस्कॉस्मोस की कंपनी ग्लावकॉस्मोस के बीच इसके लिए 27 जून 2019 को समझौता हुआ था। इस ट्रेनिंग सेंटर का नाम 12 अप्रैल 1961 को अंतरिक्ष जाने वाले पहले इंसान यूरी गागरिन के नाम पर रखा गया है। सोवियत वायुसेना के पायलट गागरिन ने वोस्टोक-1 कैप्सूल में बैठकर पृथ्वी की कक्षा का चक्कर लगाया था। ग्लावकोस्मॉस ने कहा, “भारत के पायलटों को असमान जलवायु और भौगोलिक परिस्थिति में लैंडिंग का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।”

इसरो ने ह्यूमनॉइड व्योममित्रा का वीडियो जारी किया था
भारत के पहले अंतरिक्ष यात्री राकेश शर्मा 1984 में रूसी यान में बैठकर अंतरिक्ष गए थे। गगनयान मिशन के जरिए भारतीय एस्ट्रोनॉट्स भारतीय यान में बैठकर स्पेस में जाएंगे। गगनयान को जीएसएलवी मैक-3 रॉकेट से अंतरिक्ष में भेजा जाएगा। इसरो ने 23 जनवरी को गगनयान में भेजी जाने वाली ह्यूमनॉइड ‘व्योममित्रा’ का वीडियो जारी किया था। इसरो के वैज्ञानिक सैम दयाल ने कहा था-  यह ह्यूमनॉइड मानव की तरह व्यवहार करने की कोशिश करेगी और हमें वापस रिपोर्ट करेगी। हम ऐसा प्रयोग के तौर पर कर रहे हैं।

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