Sunday, October 25, 2020
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दिल्ली बोली – और पांच साल लगे रहो केजरीवाल

नई दिल्ली. दिल्ली विधानसभा चुनाव के रुझानों में आम आदमी पार्टी (आप) को स्पष्ट बहुमत मिलना तय लग रहा है। हालांकि, उसे 10 से ज्यादा सीटों का नुकसान हो रहा है। आप के हिस्से की ये सीटें भाजपा के खाते में जा रही हैं। भाजपा को पिछली बार 3 सीटें मिली थीं, वह इस बार 10 से ज्यादा सीटों पर बढ़त बनाए हुए है। कांग्रेस पिछली बार की ही तरह इस बार भी शून्य पर है। 70 विधानसभा सीटों के लिए 8 फरवरी को 62.59% वोट डाले गए थे। दिल्ली में अभी आप की सरकार है। भाजपा 22 साल और कांग्रेस 7 साल से सत्ता से दूर है।

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल तीसरी बार सीएम बनने जा रहे हैं। वे पहली बार 2013 में 48 दिन इस पद पर रहे, फिर इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने दूसरी बार 14 फरवरी 2015 को सत्ता संभाली थी।भाजपा को पिछली बार 3 सीटें मिली थीं, वह इस बार 15 से 20 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है। कांग्रेस पिछली बार की ही तरह इस बार भी शून्य पर है। 70 विधानसभा सीटों के लिए 8 फरवरी को 62.59% वोट डाले गए थे। दिल्ली में अभी आप की सरकार है। भाजपा 22 साल और कांग्रेस 7 साल से सत्ता से दूर है।
दिल्ली में अरविंद केजरीवाल ने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और कांग्रेस पर झाड़ू लगा दिया है। कुल पड़े मतों का 50 परसेंट से ज्यादा हिस्सा हासिल कर केजरीवाल तीसरी बार दिल्ली का ताज पहनेंगे। ताजा रुझानों के मुताबिक आम आदमी पार्टी (आप) 45 से 55 सीटें जीतने की ओर बढ़ रही है। दिल्ली के दंगल ने कई राजनैतिक संदेश दिए हैं। राजस्थान, मध्य प्रदेश , पंजाब के बाद दिल्ली ने साबित किया है कि विधानसभा चुनाव में जनता स्थानीय मुद्दों को तरजीह देती है। शाहीनबाग का मुद्दा भले ही गले नहीं उतरा हो लेकिन बीजेपी ने अपनी स्थिति मजबूत ज़रूर की है।

बीजेपी दिल्ली के दंगल में लेट से कूदी। शाहीनबाग से माहौल बदलने की कोशिश हुई। शुरुआत में केजरीवाल की हवा तेज थी लेकिन अमित शाह के आक्रामक प्रचार ने हालात बदल दिए लेकिन तब तक देर हो चुकी थी। केजरीवाल ने बेहद चालाकी से दिल्ली के मुद्दों पर फोकस करना जारी रखा। ये आप के पक्ष में गया। दूसरी ओर कांग्रेस ने मानो शुरू से ही हार मान ली थी। ये तो उनके उम्मीदवार मुकेश कुमार के ट्वीट से ही पता चलता है। उन्होंने काउंटिग शुरू होने से पहले ही हार मान ली।

दिल्ली के दंगल में सीधी जंग बीजेपी और केजरीवाल के बीच हुई। चुनवा की घोषणा के समय तो ये लड़ाई भी एकतरफा मानी जा रही थी। बाद में बीजेपी ने वापसी की। इस वापसी का इंजन बना राष्ट्रीय मुद्दे, पीएम नरेंद्र मोदी का चेहरा और शाहीनबाग। दूसरी ओर अऱविंद केजरीवाल बिजली – पानी जैसे बुनियादी मुद्दों को उठाते रहे।

स्थानीय बनाम राष्ट्रीय मुद्दे

दिल्ली की पब्लिक ने स्थानीय मुद्दों पर वोट दिया, ऐसा लगता है। ताजा रुझानों के मुताबिक स्लम, अनियमित कालोनियों और ग्रामीण इलाकों में केजरीवाल की पार्टी जबर्दस्त प्रदर्शन कर रही है। उदाहरण के लिए बुराड़ी सीट लीजिए। विकास के मामले में ये पीछे है। यहां बिहार – उत्तर प्रदेश के लोगों की तादाद काफी है। मुकाबला आप के संजीव झा और नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू के कैंडिडेट के बीच है। ट्रेंड के मुताबिक संजीव झा काफी अंतर से आगे हैं और शायद जीत जाएँ।

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