Tuesday, October 20, 2020
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अधीर रंजन बोले- अर्थव्यवस्था में पैबंद लग चुके हैं, निर्मला जी सर्जरी करें

नई दिल्ली. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शनिवार को सदन 2020-21 का आम बजट पेश  किया। इससे पहले कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा- अर्थव्यवस्था में थेगड़े (टैटर्स/पैबंद) लग चुके हैं। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ही हैं, जो कॉस्मेटिक सर्जरी कर सकती हैं। क्योंकि, भाजपा सरकार तो इमरान खान या पाकिस्तान के मुसलमानों की बात करने में ही लगी रहती है।

वहीं, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा- दिल्ली के लोगों को पूरी उम्मीद है कि केंद्र सरकार बजट में दिल्ली के हितों की रक्षा करेगी। चुनाव के मद्देनजर दिल्ली को और भी ज्यादा मिलना चाहिए। बजट बताएगा कि भाजपा को हम दिल्लीवालों की कितनी परवाह है।

प्रशांत भूषण ने कहा- निर्मला सीतारमण और अनुराग ठाकुर ने नौकरी की कमी, किसानों की आत्महत्या, गिरती हुई जीडीपी, खत्म होते कारोबार के बीच का बजट पेश किया। सीतारमण अपने बॉस की तरह कहती हैं- ‘सब चंगा सी’! अनुराग ठाकुर ने कहा होगा- देश के बेरोजगारों, व्यापारियों और किसानों को गोली मारो!

 

कांग्रेस प्रवक्ता संजय झा ने कहा कि बजट के लिए वित्त मंत्री की आलोचना न करें। क्योंकि इसे एलेक्सा (अमेजन का आर्टिफिशियल असिस्टेंट) द्वारा तैयार किया गया है।

 

‘खराब हुई अर्थव्यवस्था के लिए भी वित्त मंत्री को माफी मांगनी चाहिए’

कांग्रेस प्रवक्ता जयवीर शेरगिल ने कहा- 2020 के बजट में बढ़ती बेरोजगारी, बढ़ती किसान आत्महत्याएं, गरीबी से हो रही आत्महत्याएं, ईंधन की बढ़ती कीमतें, बढ़ती महंगाई, बढ़ती लागतें, बढ़ती बैंक धोखाधड़ी को गोली मारी जानी चाहिए। उन्होंने कहा- वित्त मंत्री को बजट पेश करने से पहले अर्थव्यवस्था को बर्बाद करने के लिए माफी मांगनी चाहिए। इस बजट में रोजगार बढ़ाने के लिए योजनाएं लाई जानी चाहिए। मध्यम वर्ग को बचत के लिए प्रोत्साहन दिया जाना चाहिए।

 

बायोकॉन की संस्थापक किरण मजूमदार शॉ ने कहा- हमारे आर्थिक कैंसर को कीमोथेरेपी की नहीं बल्कि इम्यूनोथेरेपी की जरूरत है। हमें इसके कारणों से लड़ने की जरूरत है न कि इसके लक्षणों से। उम्मीद है 2020 के बजट में इस पर भी ध्यान दिया जाएगा। वित्तीय सृजन हमारी आर्थिक प्रतिरक्षा तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

 

कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा- पिछले साल के बजट पर गौर करें तो बेरोजगारी काफी बढ़ी है। आय में गिरावट आई है। निवेश में कमी आई है। जीडीपी भी घट गई है।

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