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सिंधिया संपत्ति से जुड़े ज्योतिरादित्य के पुत्र महाआर्यमन

सिंधिया संपत्ति से जुड़े ज्योतिरादित्य के पुत्र महाआर्यमन

उज्जैन। सिंधिया राजवंश की संपत्ति को लेकर ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनकी बुआओं के बीच चल रही आंतरिक खींचतान की खबरों के बीच ज्योतिरादित्य के पुत्र महाआर्यमन सिंधिया उज्जैन स्थित एक संपत्ति के ट्रस्टी बन गए हैं। प्रशासन ने बकायदा एक आदेश जारी कर सख्याराजे धर्मशाला का नया ट्रस्टी महाआर्यमन को बना दिया है।

उज्जैन सहित देशभर में सिंधिया राजघराने की करोड़ों रुपयों की संपत्ति है। देवासगेट बस स्टैंड के पास सख्याराजे धर्मशाला उनमें से एक है। ट्रस्टी महेंद्रसिंह कालूखेड़ा के स्थान पर महाआर्यमन को ट्रस्टी नियुक्त किया गया है। एसडीएम राकेश मोहन त्रिपाठी ने मप्र लोक न्यास अधिनियम 1951 की धारा 9 के तहत ट्रस्ट पंजीयन रजिस्टर में संशोधन कर महाआर्यमन को नया ट्रस्टी नियुक्त किया है।

श्रीमंत सख्याराजे सदावत धर्मशाला ट्रस्ट उज्जैन (जो ट्रस्ट पंजी क्रं. 30 पर दर्ज है) के मैनेजिंग ट्रस्टी विजयसिंह फालके पिता रंजीतसिंह ने ट्रस्ट मीटिंग प्रोसीडिंग 20 जनवरी 2018 के अनुसार ट्रस्टी महेंद्रसिंह कालूखेड़ा का निधन होने पर उनके स्थान पर श्रीमंत युवराज महाआर्यमन सिंधिया को ट्रस्टी नियुक्त करने के लिए संशोधन करने की अर्जी दी थी। एसडीएम न्यायालय ने प्रकरण दर्ज कर विज्ञप्ति जारी की और जाहिर सूचना प्रकाशित कर सूचना चस्पा भी की। कोई आपत्ति प्राप्त न होने पर एसडीएम ने 28 जनवरी को यह आदेश जारी किया।सख्याराजे धर्मशाला के पास एक मकान को लेकर जनवरी 2014 में विवाद भी सुर्खियों में आया था। अवैध रूप से मकान बनाने को लेकर यह विवाद उठा था। बाद में नगर निगम ने कार्रवाई कर अवैध निर्माण जमींदोज कर दिया था। वर्तमान में धर्मशाला की जमीन करोड़ों रुपए की है। यह बस स्टैंड के पास शहर के सबसे मौके की जगह पर है। धर्मशाला से भी ट्रस्ट को आय होती है। महाआर्यमन के ट्रस्टी बनने से धर्मशाला पर सीधा ज्योतिरादित्य परिवार का नियंत्रण हो गया है।

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