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पद्मश्री के लिए नामित गैस पीड़ितों की आवाज उठाने वाले भोपाल के अब्दुल जब्बार के संघर्ष की कहानी

पद्मश्री के लिए नामित गैस पीड़ितों की आवाज उठाने वाले भोपाल के अब्दुल जब्बार के संघर्ष की कहानी

 

 

जाने माने पत्रकार ब्रजेश राजपूत बता रहे है अब्दुल जब्बार की पारिवारिक पृष्ठभूमि और उनके संघर्ष की कहानी

 

भोपाल के अब्दुल जब्बार को पदमश्री
भोपाल में लंबे समय तक गैस पीडितों की आवाज बन कर संघर्प करने वाले अब्दुल जब्बार को सरकार ने मरणोपरांत पदमश्री से नवाजा है। जब्बार ने पैंतीस साल तक गैस पीडितों की आवाज को भोपाल से निकाल कर सुप्रीम कोर्ट और संसद तक पहुंचायी। जब्बार के चाहने वाले इस सम्मान से खुश तो हैं मगर वो ये भी कह रहे हैं कि बहुत देर कर दी।
भोपाल के राजेद्र नगर के इस पुराने टूटे से मकान को देखकर अंदाजा लगाना मुश्किल होगा कि यहां रहने वाला शख्स शहर का सबसे जनप्रिय व्यक्ति रहा होगा। इस दो कमरे के बेहद सामान्य से मकान में गैस पीडितों के नेता अब्दुल जब्बार अपनी पत्नी और तीन बच्चों के साथ रहते थे और लंबी बीमारी से लडते हुये वो नबंवर में चल बसे।
कल रात से यहंा इस मकान पर चहल पहल बढी है क्योंकि सरकार ने जब्बार को समाजसेवा के लिये पदमश्री से सम्मानित करने का फैसला किया है। जब्बार की पत्नी शायरा बानो कहती हैं कि जब्बार साब के जाने के बाद से हम टूट से गये हैं अब सरकार के सम्मान का शुक्रिया अदा करते हैं पर मन में ख्याल आता है कि ये सम्मान उनके जीते जी मिलता तो कितना अच्छा होता। वो गैस पीडितों के नेता रहे हैं कभी अपनी और परिवार की नहीं सोची इसलिये हमारे लिये संकट की घडी है मुझे रोजगार मिल जाये तो परिवार का खर्चा चला पाउं ये बेहतर होगा।
भोपाल में दो दिसंबर को यूनियन कारबाइड कारखाने से रिसी गैस ने हजारों लोगो की जान ले ली थी। इस गैस कांड में हजारों लोग जहरीली गैस का शिकार हो कर दम तोड दिया था तो लाखों लोग आज तक बीमार हैं। जब्बार देवास की फैक्टी में काम करते थे मगर गैस कांड होते ही सब छोडकर गैस पीडितों की लडाई लडने के लिये भोपाल आ गये और लगातार पैंतीस साल तक गैस पीडितों की बेहतरी के लिये बहुराप्टीय कंपनी और कोर्ट से लडाई लडी। गैस कांड में जब्बार ने अपने परिवार के लोगों को खोया पर अपने दर्द को भुला कर गैस पीडित उन महिलाओं को सहारा दिया जिनका घर परिवार उजड गया था। भोपाल गैस पीडित महिला उदयोग संगठन के नाम से उन्होने जो संगठन बनाया उसके तहत ढाई हजार महिलाओं को रोजी रोटी कमाने का प्रशिक्षण दिया। इसके अलावा सरकार कोर्ट कचहरी में भी लगातार याचिकाएं लगाकर गैस पीडितों के इंसाफ की लडाई उन्होंने जारी रखी। उनकी याचिका पर ही केंद्र सरकार ने भोपाल में ही करोडों रूप्ये खर्च कर भोपाल मेमोरियल एंड रिसर्च सेंटर खोला गया मगर जब्बार जब बीमार हुये तो वहां पर भी उनका बेहतर इलाज ना हो सका। जब्बार के संगठन भोपाल गैस पीडित महिला उदयोग संगठन को अब हमीदा बी संभाल रही हैं वो भी इस सम्मान से गमजदा ही हैं बार बार यहीं कहती है उनका इलाज सरकार करा ना सकी अब सम्मान दे रही है हम जरा भी खुश नहीं है। हमारा भाई चला गया।
गैस पीडितों के दुख तकलीफ में अपनी सेहत जब्बार ने गंवा दी दो बार उनको हदयाघात हुआ और 15 नबंवर को उनका इंतकाल हो गया। मगर अपने पीछे वो संघर्प की बडी विरासत सौंप गये हैं। उनके घर परिवार के लोग अब भी मदद के तलबगार हैं। कमलनाथ सरकार ने पिछले दिनों जब्बार को इंदिरा गांधी सम्मान से सम्मानित कर दस लाख रूप्ये की मदद की अब केंद्र सरकार ने पदमश्री देकर उनके काम को सम्मान दिया है। उनके भाई अब्दुल शमीम देर से ही सही मिल रहंे सम्मान पर संतोप कर रहे हैं। वो कहते है सरकार ने उस संघर्पशाील आदमी का सम्मान किया जिसे जीते जी जरा भी सुविधा किसी चीज की नहीं मिली।
दरअसल अब्दुल जब्बार का सम्मान उस नेता का सम्मान है जिसने अपनी जिंदगी दूसरोें का जीवन बेहतर करने में लगा दी उसके जीते जी ना तो उसे राज्य सरकार ने पहचाना और ना केंद्र ने। भोपाल ाशहर के लोग भी उनकी मदद पर तब आगे आये जब वो अंत के करीब पहुंच गये थे। फिर भी देर आये दुरूस्त आये।

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