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नैतिक मूल्यों के पतन की कहानी है कफ़न*

नैतिक मूल्यों के पतन की कहानी है कफ़न*

  • *-मेला रंगमंच पर हुआ तीन नाटकों का मंचन*
    *ग्वालियर, 17 जनवरी।* समय के साथ नैतिक मूल्यों का पतन होने से मानवीयता खत्म हो रही है। इंसान किस हद तक गिर सकता है, इसे कृष्णकांत द्विवेदी द्वारा निर्देशित नाटक ‘कफन’ में मार्मिकता के साथ दिखाया गया है। यह नाटक मेला रंगमंच पर शुक्रवार रात मंचित किया गया। इसके अलावा दीपदान व मोनिया द ग्रेट नाटकों का मंचन भी हुआ।
    आरंभ में मेला उपाध्यक्ष डॉ. प्रवीण अग्रवाल, पूर्व पार्षद सुरेंद्र सिंह चौहान, अमित चितवन, प्रदीप गर्ग आदि ने मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर दीप प्रज्वलित किया। ‘दीपदान’ कला समूह की प्रस्तुति थी। इसका निर्देशन एमके होजाईडम्बा सिंह थे।
    *कुंवर को बचाने दी पुत्र की बलि*
    दीपदान नाटक में बताया गया है कि चित्तौड़गढ़ के महाराजा संग्रामसिंह के अनुज पृथ्वीसिंह का दासी पुत्र बनवीर महाराजा विक्रमादित्य सिंह की हत्या कर देता है। वह कुंवर उदयसिंह को भी अपने रास्ते से हटाना चाहता है। उदयसिंह को मारने के लिए बनवीर मयूरकुंड में दीपदान उत्सव आयोजित करता है। इसका पता चलने पर पन्नाधाय उत्सव का लाभ उठाकर उदयसिंह की रक्षा करने के लिए कीरतबारी की मदद से कुंवर को टोकरी में छिपाकर राजभवन से बाहर भेज देती है और उनके स्थान पर अपने लाड़ले बेटे चंदन को सुला देती है। बनवीर, चंदन को उदयसिंह समझकर तलवार से उसे मौत के घाट उतार देता है। इस नाटक के माध्यम से एक मां के त्याग और बलिदान का संदेश दिया गया है। इसमें वैशाली मिश्रा, रश्मि धारोन, आकांक्षीता, उमंग शर्मा, वीरसिंह जादौन, अनुशा सक्सेना, सुजाता, अमरदीप, मयंक दीक्षित आदि ने शानदार अभिनय किया।
    *गांधी का दर्शन है मोनिया द ग्रेट*
    आर्टिस्ट कंबाइन ग्वालियर की प्रस्तुति ‘मोनिया द ग्रेट’ के निर्देशक रवि आफले हैं। इसमें महात्मा गांधी के बचपन की घटनाओं को दृश्यों के माध्यम से दिखाया गया है। नाटक की शुरुआत में दिखाया गया है कि बच्चों को खेलते समय चोट लग जाती है तो झगड़ा होने पर मोनिया उन्हें समझाईश देकर कहता कि हमें किसी भी क्षेत्र में छुआछूत नहीं करना चाहिए। मोनिया अपने साथियों को सच बोलने, नकल नहीं करने, बड़ों का आदर करने को कहता है। साथ ही झूठ बोलने पर पिता के समक्ष स्वीकार कर माफ़ी मांगता है। इस नाटक में वर्तमान में सोशल मीडिया पर गांधी के बारे में किए जा रहे दुष्प्रचार को भी दिखाया गया है। इस नाटक में मोहम्मद अजीब, युवराज शर्मा, रौनक राजपूत, हैरी दुबे, कवि शिवहरे ने अभिनय किया।
    *कफ़न ने झकझोर दिया*
    कृष्णकांत द्विवेदी द्वारा निर्देशित नाटक ‘कफ़न’ मानवीय मूल्यों में आ रही गिरावट को दर्शाता है। इसमें चेतना के अनेक छोरों, सामाजिक कुरीतियों और आर्थिक उत्पीड़न के विविध रूप बताए गए हैं। मूलतः यह कहानी मूल्यों के खंडहर होने की है। इसमें आधुनिकता के सारे मुद्दे उठाए गए हैं। आज के समाज को कैसे निखारा जा सकता है, इसे भी दर्शाया गया है। इसमें बताया गया है कि एक महिला अपने पति व ससुर की भरपूर सेवा करती है, लेकिन जब वह गर्भवती होती है तो उसकी देखभाल करने की बजाय इंतजार करते हैं कि उसकी मौत कब होगी। इसमें रितेश त्यागी, आयुष धाकड़, दिशा मिश्रा, प्रदीप कुशवाह, अशोक चौधरी, रमन रावत, विकास रावत, दीपेंद्र बघेल, अजय पाल आदि ने जीवंत अभिनय किया।
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