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बनने के पहले ही ध्वस्त हो गया बांध,सैकड़ों एकड़ फसल तबाह

निर्माणाधीन बांध फूटा सैकड़ो एकड़ फसल तवाह
जलसंसाधन विभाग व ठेकेदार का भृष्टाचार उजागर
छीतापार
सिवनी जिले के आदिवासी अंचल घंसौर के अंर्तगत आने वाले ग्राम सरोरा में निर्माणाधीन बांध पहली बरसात में ही फूट गया जिसके चलते बांध के आस पास की सैकड़ों एकड़ फसल तबाह हो गई। सोमबार की रात घंसौर में पहली बार तेज बरसात हुई थी । जिसके चलते उक्त निर्माणाधीन बांध फूट गया ।

 

 

 

 

 

 

ग्रामीणों का कहना है कि उनके द्वारा सिंचाई विभाग के अनेकों अधिकारियों को फोन पर सूचना दी गई की बरसात बहुत तेज हो रही है जिसके चलते बांध में जल स्तर लबालब भर हुआ है बांध में पड़ी दरारों से ग्रामीणों ने बांध फूटने का पूर्वानुमान अधिकारियों को दिया लेकिन अपनी मनमर्जी से ओतप्रोत अधिकारियों ने ग्रामीणों की एक न सुनी जिसके चलते करोडों की लागत से बना नवीन बांध तास के पत्तों की तरह ढह गया । बताया जाता है कि सिंचाई विभाग के अधिकारी अपनी लचर कार्यप्रणाली के लिये चर्चित हैं। यह पहला मामला नहीं जब शासन प्रशासन के पैसों का बंदरबांट कर जनता की गाढ़ी कमाई को यूँही उड़ाया गया हो समय समय पर जिले के कई क्षेत्रों से ऐसे कई निर्माणाधीन बांध ढहने की खबर पहले भी आती रही है ।

 

 

 

 

 

 

 

 

हाल ही में जिले के केवलारी से भी नवनिर्मित नहर के फूटने के भी समाचार सबके सामने आए थे । वह भी सिंचाई विभाग के द्वारा बनाई जा रही थी । जिसका नुकसान भी सरकारी खर्चे में जुड़ा था । मगर इन सब से बेपरवाह अधिकारियों को इससे क्या इन्होंने कोई सबक नहीं लिया और एक बार फिर दुःखद घटना घट गई । अब सवाल यह उठता है कि क्या सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने कोई टेक्निकल टीम की मदद बांध बनाते समय नहीं ली ? या फिर अधिकारियों ने घटिया निर्माण सामग्री का उपयोग किया ? सवाल तो यह भी उठता है क्या बांध तकनीकी खराबी से फूटा या फिर इसे जानबूझकर भृष्टाचार की भेंट चढ़ा दिया गया ?

 

 

 

 

 

 

 

 

प्राप्त जानकारी के अनुसार निर्माणाधीन बांध के समीप एक किसान खोबेप्रसाद सेन अपने खेत मे काम कर रहा था जैसे ही उसे जानकारी लगी कि बांध फूट गया सदमे से उसे अटैक आ गया जिसे रात को ही सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र घंसौर में भर्ती कराया गया जहाँ उसका प्राथमिक ईलाज करने के बाद उसे लखनादौन रैफर कर दिया गया । ग्रामीणों ने बताया कि सोमवार की शाम से अधिकारियों को लगातार फोन करके गांव बुलाया गया मगर अधिकारी देर रात गांव पहुँचे जब तक बांध फूट चुका था ।

 

 

 

 

 

 

 

 

अधिकारियों से पहले जिला पंचायत उपाध्यक्ष चन्द्रशेखर चतुर्वेदी गांव पहुंचे चुके थे जब उन्होंने अधिकारियों को फोन किया तब जाकर अधिकारी गांव पहुंचे जबकिं कुछ ग्रामीण बताते हैं कि सिंचाई विभाग की ओर से जो अधिकारी रात में पहुँचे वे नशे की हालत में थे । जबकि सुबह तक सरोरा गांव व आसपास के क्षेत्र में पानी ही पानी दिख रहा था फसलों के नामोनिशान तक खेतों नहीं थे पूरे खेत पानी से लबालब भरे हुए थे जबकि तबाह फसलों के दर्द को लिये किसान यहाँ वहाँ घूम अपनी व्यथा एक दूसरे से सुना रहे थे । पुलिस, राजस्व व सिंचाई विभाग के अधिकारियों से सुबह से ही गांव अटा पड़ा था अनुविभागीय अधिकारी रजनी वर्मा ने सिंचाई विभाग के अधिकारियों को फटकार लगाते हुए उन्हें तवाह हुई फसल का जल्द सर्वे कराकर जाँच कराने के आदेश एक तरफ दिए तो दूसरी ओर गांव में किसानों को ढांढस भी बंधाया । राजस्व विभाग के अधिकारी कर्मचारी की पूरी टीम सुबह से ही तबाही का अनुमान लगाने सरोरा व आसपास के गांवों में निकल चुके थे जबकि सिंचाई विभाग से जुड़े सूत्र बताते हैं कि इस बांध की अनुमानित लागत 5 करोड़ रुपये हैं। जबकि 5करोड़ 35 लाख रुपये की राशी डूबप्रभावितों को वितरित करने के लिए निर्धारित की गई थी । जबकि अब तक किसानों को किसी भी प्रकार की मुआवजा राशि नहीं दी गई थी ।

 

 

 

 

 

 

 

 

इनका कहना है
फिलहाल हमारी प्राथमिकता किसानों को ढांढस दिलाना है । बांध फूटने के पीछे जो भी दोषी होगा कार्यवाही की जाएगी एवं rbc 64 के अंतर्गत किसानों को हुए नुकसान का सर्वे कराया जाएगा
रजनी वर्मा sdm घंसौर
सिंचाई विभाग के अधिकारियों की लापरवाही से बांध फुट गया । समय रहते अगर अधिकारी ध्यान दे देते तो बांध को सुरक्षित बचाया जा सकता था इसकी उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिये
चंद्रशेखर चतुर्वेदी जिला पंचायत उपाध्यक्ष सिवनी
भारी बारिश के चलते बांध का थोड़ा हिस्सा फूट गया है । हमारी टीम मौके पर नजर बनाए हुए है।
मोहन सिंह बघेल sdo सिंचाई विभाग घंसौर

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