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सटीक और सच्ची जानकारी लोगों तक पुस्तकों के जरिये ही पहुंचेगी

पुस्तक मेले में ग्रामीण पत्रकारिता विकास संस्थान और राष्ट्रीय पुस्तक न्यास द्वारा “किताबें कैसे पहुंचें गाँव ” विषय पर परिसंवाद आयोजित हुआ
ग्वालियर। वरिष्ठ संपादक डॉ राम विद्रोही ने इस अवसर पर कहा कि आज जो लिखा जा रहा है, जो छापा जा रहा है वो आम आदमी को उद्वेलित क्यों नहीं करता..? लेखक आजकल लिख ज्यादा रहे हैं पढ़ कम रहे हैं। गांव तक किताबें कैसे सुविधाजनक तरीके से पहुंचें यह विचार करना चाहिए।
वे  बात आज राष्ट्रीय पुस्तक न्यास द्वारा आयोजित ग्वालियर पुस्तक मेले में “किताबें कैसे पहुंचें गांव” विषय पर आयोजित परिसंवाद में मुख्य अतिथि के रूप में बोल रहे थे।कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्थान के अध्यक्ष और वरिष्ठ पत्रकार देव श्रीमाली ने की ।
परिसंवाद का आयोजन ‘ग्रामीण पत्रकारिता विकास संस्थान’ द्वारा राष्ट्रीय पुस्तक न्यास के सहयोग से किया था। उन्होंने कहाकि गांवों और स्कूलों में पुस्तकालयों का कोई वजूद ही नहीं है। विश्वविद्यालयों तक के पुस्तकालय बेहाल हैं। शिक्षा की प्रणाली बदलने से हम किताबों से भी दूर हो गए हैं। छपे हुये शब्द की महत्ता हमेशा रही है लेकिन आज हालात बदल गए हैं। साहित्य समाज को सुसंस्कृत बनाता है। गांव तक पुस्तकालयों की श्रृंखला स्थापित करना होगी।वरिष्ठ पत्रकार सुरेंद्र माथुर ने कहा कि आज बिजली, इंटरनेट सब गांव तक पहुंच गए हैं लेकिन किताब नहीं पहुंच रही है। किताबें दुनिया की , समाज की, मूल्यों की जानकारी किताबों से मिलती है। किताब किसी को धोखा नहीं देती। किताब दूर दूर ,गांव गांव तक पहुंचना ही चाहिए।
वरिष्ठ पत्रकार और कथाकार प्रमोद भार्गव ने कहा कि ग्रामीण समाज ने मिथकों तक का संरक्षण किया। ग्राम्य जीवन लोककथाओं तक के लिए जागरूक रहा है। वाचिक परम्परा के जरिये गांवों ने साहित्य को हमेशा सुरक्षित रखा है। आज गलत नीतियों के कारण किताबों को गांव तक पहुंच नहीं पा रहीं। जिला स्तर तक लगने वाले मेले तक बंद हो गए हैं। इंटरनेट ने किताबों की पठनीयता को कम किया है। अनुचित सामग्री इस माध्यम से लोगों तक पहुंच रहीं हैं इस पर रोक लगाना चाहिये।
वरिष्ठ पत्रकार रविन्द्र झारखरिया ने अपने संबोधन में कहा कि किताबों और गांव के बीच का बिंदु होता है पाठक। जब किताब की बात होगी तो केंद्र में पाठक की बात जरूर होगी। बदलाव के दौर में गांव की तस्वीर भी उलट पुलट गयी है। बाज़ारवाद के असर से किताबें भी अछूती नहीं हैं। इसका असर लेखक पर भी होता ही है। हर साल 10 लाख गांव के लोग उपभोक्ता के रूप में बाजार से नये जुड़ते हैं। आज बाज़ार ख़ुद चल कर उपभोक्ता के दरवाजे पर चल कर आता है। हमारी संवेदनाएं मर रहीं हैं ये खतरनाक स्थिति है।किताबों जैसा तालमेल टीवी या इंटरनेट से सम्भव नहीं है।लेखक को भी गांव से जुड़ना होगा तब रचना या किताब गांव तक पहुंचेगी।
जनसंपर्क के सेवानिवृत्त संयुक्त संचालक सुभाष अरोरा ने कहा कि लोककल्याणकारी राज्य का पहला काम नागरिकों को हर सुविधा प्रदान करना है। समाज को शिक्षित करने का काम भी इसमें शामिल है। उत्तर पूर्व के राज्यों में अन्य राज्यों की तुलना में पाठकीय प्रवृत्ति बेहतर है। पुस्तकालय आंदोलन को बढ़ाना आवश्यक है। मोबाइल वेन के ज़रिए गांव गांव तक क़िताबों को पहुंचाना चाहिए।
ग्रामीण पत्रकारिता विकास संस्थान के अध्यक्ष देव श्रीमाली ने कहा चिंता की बजह किताबो का मार्किट बचाना नहीं बल्कि लोगो के दिमाग बचाने की है । डिजिटल माध्यम से अधकचरी और अप्रमाणित सामग्री भी लोगो के दिमाग में पहुँचकर मुश्किल कर रहे है । इसके लिए गाँव मे सटीक और प्रमाणित किताबे भेजना जरूरी है । इसकी नई पाइपलाइन तैयार होना जरूरी है ।
संगोष्ठी के प्रारंभ में राष्ट्रीय पुस्तक न्यास के सम्पादक पंकज चतुर्वेदी ने ‘गांव तक किताबें कैसे पहुंचे’ इस विषय की रूपरेखा रखी। उन्होंने पुस्तक न्यास द्वारा किताबों के प्रचार, प्रसार के लिए किए जा रहे कामों की विस्तार से जानकारी दी ।
● परितोष मालवीय द्वारा अनुदित किताब का विमोचन
 पुस्तक मेले में प्रतिष्ठित अनुवादक परितोष मालवीय द्वारा अनुदित किताब “अशांत विश्व में भारत की सुरक्षा” का विमोचन भी हुआ। किताब के मूल लेखक एयर कमोडोर जसजीत सिंह हैं।
विमोचन डॉ राम विद्रोही, डॉ राकेश पाठक, सुभाष अरोरा,प्रमोद भार्गव, रविन्द्र झारखरिया, देव श्रीमाली, सुरेंद्र माथुर और पंकज चतुर्वेदी द्वारा किया गया। विमोचन के बाद परितोष मालवीय ने पुस्तक और अनुवाद के बारे में जानकारी दी।
● शायरा रश्मि सबा और अतुल अज़नबी का अभिनन्दन
इस अवसर पर संस्थान ने मप्र उर्दू अकादमी द्वारा हाल ही ‘शिफा ग्वालियरी अवार्ड’ से सम्मानित रश्मि सबा को कमल माखीजानी  ने और पन्नालाल’नूर’ अवार्ड से सम्मानित अतुल अज़नबी का  वरिष्ठ पत्रकार और प्रदेश टुडे के संपादक चंद्रवेश पांडे द्वारा अभिनंदन भी किया गया। रश्मि और अतुल ने अपने चुनिंदा शे’र भी सुनाए। इससे पहले डॉ सत्य प्रकाश शर्मा , तेजपाल सिंह,सुरजीत यादव,विवेक अवस्थी, विकास शर्मा सौरभ सक्सेना  ,रवीं सिकरवार आदि ने अतिथियों का स्वागत और सम्मान पत्र भेंट किया ।

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