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रेडियो कॉलर से लैस होगा चंदू

चंदू का लगाया जाएगा रेडियो काॅलर

-एनटीसीए ने दी अनुमति

-रेडियो काॅलर ले आये विश्व प्रकृति निधि के विशेषज्ञ

पीलीभीत ( अमिताभ अग्निहोत्री )। माधौटांडा थाना क्षेत्र के ग्राम चांदूपुर मंे पकडे गए बाघ को रेडियो काॅलर लगाकर छोडा जाएगा। जिससे उसकी प्रत्येक गतिविधि पर निगरानी रखी जाए। पकडे गए बाघ चंदू को रेडियो काॅलर लगाने के लिए वन संरक्षक पीपी सिंह ने प्रमुख वन संरक्षक वन्यजीव से आग्रह किया था। प्रमुख वन संरक्षक ने इस संबंध में एनटीसीए से अनुमति मांगी। आज एनटीसीए ने अनुमति प्रदान कर दी है। रेडियो काॅलर लेकर विश्व प्रकृति निधि के दिल्ली से विशेषज्ञ डाॅ.अरिंदम यहां पहुंच गए है।

 

 

 

 

 

इधर भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान इज्जतनगर बरेली से भी वन्यजीव चिकित्सकों की एक टीम भी मुस्तफाबाद पहुंच गई है। फिलहाल चंदू को अभी मुस्तफाबाद में ही रखा गया है।

सोमवार को तहसील कलीनगर के माधौटांडा थाना क्षेत्र के ग्राम चांदूपुर के मजरा वीरखेडा में बाघ ने गिरिजा देवी को अपना निवाला बनाया था। पिछले डेढ साल में बाघ की हमले में मरने वालों की संख्या अब बढकर 23 हो गई है। बाघ के हमलों में महिला की मौत बाद वन संरक्षक बरेली वृत्त पिनाकी प्रसाद सिंह ने हत्यारे बाघ को ट्रेंकुलाइज करने का आदेश दिया था। उसे ट्रेंकुलाइज भी कर लिया गया। उसे फिलहाल मुस्तफाबाद में रखा गया है।

 

 

 

 

 

 

वन संरक्षक पिनाकी प्रसाद सिंह ने इस संबंध में प्रमुख वन संरक्षक वन्यजीव एसके उपाध्याय से वार्ता की। उन्होंने कहा कि इस बाघ को जंगल मंे छोडे जाने से पूर्व यदि इसमें रेडियो काॅलर लगा दिया जाए तो यह बेहतर रहेगा। इस पर प्रमुख वन संरक्षक वन्यजीव एसके उपाध्याय ने केंद्रीय बाघ संरक्षण परिषद  (एनटीसीए) से वार्ता की और इसे रेडियो काॅलर लगाये जाने का प्रस्ताव भेजा। इस पर एनटीसीए ने आज पकडे बाघ चंदू को रेडियो काॅलर लगाये जाने की अनुमति प्रदान कर दी।

 

 

 

 

 

वन संरक्षक पिनाकी प्रसाद सिंह ने बताया कि एनटीसीए से बाघ को रेडियो काॅलर लगाने की अनुमति मिल गई है। इसके अलावा केंद्रीय पशु चिकित्सा अनुंसधान संस्थान (आईवीआरआई) से दो वन्यजीव चिकित्सों को भी एक दल मुस्तफाबाद पहुंच गया है। इस बाघ का पूर्ण चिकित्सा परीक्षण कराया जाएगा। इसके बाद इसके विश्व प्रकृति निधि के रेडियो काॅलर विशेषज्ञ डाॅ.अरिंदम इसके रेडियो काॅलर लगायेंगे।

जब इस वन संरक्षक से पूछा गया कि इस बाघ को क्या रेडियो काॅलर लगाकर पीलीभीत टाईगर रिजर्व में छोडा जाएगा। उनका कहना था कि इस बाघ को अब पीलीभीत टाईगर रिजर्व में नहीं छोडा जाएगा। इसे प्रदेश के और किसी टाईगर रिजर्व में भेजा जाएगा। इसकी निगरानी के लिए इसके रेडियो काॅलर लगाया जा रहा है। जहां प्रमुख वन संरक्षक वन्यजीव अनुमति प्रदान करेंगे, वहां इस बाघ चंदू को छोडा जाएगा।

 

 

 

 

 

 

लगाया जाएगा सबसे आधुनिक रेडियो काॅलर

-जर्मनी में निर्मित है यह रेडियो काॅलर

चंदू को लगाया जाने वाला रेडियो काॅलर अभी तक सबसे आधुनिक रेडियो काॅलर होगा। यह रेडियो काॅलर जर्मनी में बनाया गया है। इस रेडियो काॅलर का सीधा संपर्क सेटेलाइट से होगा।

रेडियो काॅलर विशेषज्ञ विश्व प्रकृति निधि भारत के डाॅ.अरिंदम ने बताया कि यह रेडियो काॅलर वीइसी प्रो. है। यह इएचएफ सुविधा प्राप्त है। यह जर्मनी में बनाया गया है। इसकी बैटरी पांच साल तक चलती है। इसकी कीमत लगभग चार लाख रुपये है। उन्होंने बताया कि उन्होंने लखनऊ के पास रहमान खेडा में एक बाघ को रेडियो काॅलर लगाया था, इस बाघ को दुधवा राष्ट्रीय उद्यान में छोडा गया था।

पीलीभीत के वानिकी इतिहास में यह पहला मौका है जब किसी बाघ को रेडियो काॅलर लगाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि एनटीसीए की अनुमति मिलने के बाद ही यह रेडियो काॅलर लगाया जा रहा है। उनका कहना था कि इस रेडियो काॅलर की विशेषता यह है कि इससे जहां पार्क के डायरेक्टर एंटिना के माध्यम से निगरानी रख सकते है। वहीं सेटेलाइट से इसके बारे में मेल जेनरेट होकर डायरेक्टर के पास पहुंच जाएगी। जबकि एक मेल विश्व प्रकृति निधि के पास पहुंचेगी। इससे 24 घंटे इस बाघ पर निगरानी रहेगी।

 

 

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