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पत्रिकायें साहित्य के माध्यम से समाज का मार्गदर्शन करती हैं – श्रीमती माया सिंह

 

मध्य भारत हिंदी साहित्य सभा का दो दिवसीय सेमीनार प्रारंभ

 

ग्वालियर / प्रदेश की नगरीय विकास एवं आवास मंत्री श्रीमती माया सिंह ने कहा है कि पत्रिकायें साहित्य के माध्यम से समाज का मार्गदर्शन करती हैं। पुस्तकों से अच्छा कोई मित्र नहीं होता है। श्रीमती माया सिंह ने रविवार को जीवाजी विश्वविद्यालय के गालव सभागार में मध्य भारती हिंदी साहित्य सभा के दो दिवसीय सेमीनार के उदघाटन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में यह बात कही। “साहित्यिक पत्रिकाओं का योगदान” विषय पर आयोजित इस सेमीनार में देश भर के 50 से अधिक साहित्यकार शामिल हुए।

 

 

 

 

इस दो दिवसीय सेमीनार के मुख्य वक्ता खण्डवा के प्रसिद्ध साहित्यकार श्री राम परिहार थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता महापौर श्री विवेक नारायण शेजवलकर ने की। इस मौके पर हिंदी साहित्य सभा के राष्ट्रीय संगठन मंत्री एवं वरिष्ठ साहित्यकार श्री श्रीधर पराड़कर, मुम्बई के श्री ऋषि कुमार मिश्रा, भाषा संस्थान के संचालक श्री हेमन्त शर्मा सहित स्थानीय साहित्यकार और साहित्य प्रेमी उपस्थित थे।

 

 

 

 

 

नगरीय विकास एवं आवास मंत्री श्रीमती माया सिंह ने कहा कि मध्य भारत हिंदी साहित्य सभा साहित्य के माध्यम से समाज को मार्गदर्शन प्रदान करने का महत्वपूर्ण कार्य कर रही है। साहित्यकारों ने भारत के स्वतंत्रता संग्राम में भी अपनी महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन किया था। इसे भुलाया नहीं जा सकता। श्रीमती माया सिंह ने कहा कि आज के युवाओं को अच्छे साहित्य से जोड़ने की महती आवश्यकता है। युवाओं को साहित्य से जोड़ने की दिशा में हिंदी साहित्य सभा जैसी और संस्थाओं की भी आवश्यकता है।

 

 

 

 

कार्यक्रम में महापौर श्री विवेक नारायण शेजवलकर ने कहा कि आज के तेजी भरे युग में अच्छे साहित्य को पढ़ने वालों की संख्या में कमी आई है। अच्छा साहित्य लिखा जाए और उसे पढ़ा जाए, इसके लिये और प्रयास आवश्यक हैं। उन्होंने कहा कि युवाओं को अच्छे साहित्य से जोड़ने की आवश्यकता है। इस कार्य में हिंदी साहित्य सभा जैसी संस्थायें समाज में और खड़ी हों, इसके प्रयास होना चाहिए। महापौर श्री विवेक नारायण शेजवलकर ने कहा कि अच्छी किताबों का महत्व कभी भी कम नहीं हो सकता। अच्छे साहित्य का इंतजार समाज का बड़ा वर्ग हमेशा करता रहा है और करता रहेगा।

 

 

 

 

 

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता श्री राम परिहार ने कहा कि साहित्यिक पत्रिकाओं का महत्व समाज में हमेशा था, है और रहेगा। अच्छा साहित्य समाज का हमेशा की मार्ग प्रशस्त करता रहा है। श्री परिहार ने कहा कि हमारे देश में सदैव से ही गुरू-शिष्य परंपरा में साहित्य मध्यस्थता का काम करता रहा है। साहित्य संस्कृति का प्रतिनिधित्व करता है। उन्होंने कहा कि साहित्य का एक-एक शब्द दीपक की तरह रोशनी देने का काम करता है।

 

 

 

 

 

साहित्यिक पत्रिकायें सीधे जनता से जुड़ने का सशक्त माध्यम है। भारत देश की पहचान यहाँ की संस्कृति से है। संस्कृति को बचाए रखने तथा उसे और समृद्ध करने में पत्रिकायें अपना महत्वपूर्ण योगदान देती हैं। उन्होंने कहा कि मध्य भारत हिंदी साहित्य सभा द्वारा निरंतर इस प्रकार के सेमीनार आयोजित किए जाते हैं। इस प्रकार के आयोजनों से साहित्य के क्षेत्र में किए जा रहे नए-नए प्रयोगों और प्रयासों से सबको रूबरू होने का अवसर मिलता है।

 

 

 

 

कार्यक्रम के प्रारंभ में अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन कर सेमीनार का शुभारंभ किया गया। मुम्बई के साहित्यकार श्री ऋषि कुमार मिश्र ने स्वागत भाषण दिया और सेमीनार के संबंध में विस्तार से जानकारी दी।

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