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प्रख्यात गायक पं. उल्हास कशालकर “राष्ट्रीय तानसेन सम्मान” से विभूषित

 

संगीत, कला एवं संस्कृति के क्षेत्र में उत्कृष्ट काम कर रहीं 6 संस्थायें

राष्ट्रीय राजा मानसिंह तोमर सम्मान से अलंकृत

संगीत की नगरी ग्वालियर में तानसेन समारोह का भव्य शुभारंभ 

मंत्री द्वय श्रीमती माया सिंह एवं श्री पवैया ने प्रदान किए अलंकरण, अहम घोषणायें भी कीं 

 

ग्वालियर 22 दिसम्बर 2017/ भारतीय शास्त्रीय संगीत के क्षेत्र में सर्वाधिक प्रतिष्ठित पाँच दिवसीय महोत्सव “तानसेन समारोह” आज से संगीत की नगरी ग्वालियर में शुरु हुआ। सुर सम्राट तानसेन की समाधि के समीप शुक्रवार की शाम आयोजित हुए भव्य एवं गरिमामय समारोह में शास्त्रीय संगीत के सुप्रतिष्ठित गायक पण्डित उल्हास कशालकर को वर्ष-2017 के “राष्ट्रीय तानसेन सम्मान” से विभूषित किया गया। संगीत, कला एवं संस्कृति के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य कर रहीं देश की 6 संस्थाओं को इस अवसर पर राष्ट्रीय राजा मानसिंह तोमर सम्मान से अलंकृत किया गया।

नगरीय विकास एवं आवास मंत्री श्रीमती माया सिंह तथा उच्च शिक्षा मंत्री श्री जयभान सिंह पवैया ने पं. कशालकर को राष्ट्रीय तानसेन सम्मान के रूप में दो लाख रूपए की सम्मान राशि, प्रशस्ति पट्टिका व शॉल-श्रीफल भेंट किए। मध्यप्रदेश शासन द्वारा भारतीय शास्त्रीय संगीत के क्षेत्र में संगीत सम्राट तानसेन के नाम से स्थापित यह सर्वोच्च राष्ट्रीय संगीत सम्मान है। इसी तरह राष्ट्रीय राजा मानसिंह तोमर सम्मान के तहत प्रत्येक संस्‍था को एक – एक लाख रूपए की आयकर मुक्त राशि और प्रशस्ति पट्टिका भेंट कर सम्मानित किया गया।

 

 

 

 

 

इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती मनीषा भुजवल सिंह, साडा अध्यक्ष श्री राकेश जादौन, नगर निगम सभापति श्री राकेश माहौर, प्रमुख सचिव संस्कृति श्री मनोज श्रीवास्तव, संभाग आयुक्त श्री बी एम शर्मा, राजा मानसिंह संगीत विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. लवली शर्मा, कलेक्टर श्री राहुल जैन, मुरैना कलेक्टर श्री भास्कर लाक्षाकार व पुलिस अधीक्षक डॉ. आशीष मंचासीन थे।

राष्ट्रीय तानसेन अलंकरण प्रदान करने से पहले संस्कृति विभाग के प्रमुख सचिव श्री मनोज श्रीवास्तव ने पं. कशालकर एवं सभी संस्थाओं के सम्मान में प्रशस्ति का वाचन किया। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश शासन पं. उल्हास कशालकर को शास्त्रीय गायन के क्षेत्र में सुदीर्घ साधना, गहरी कल्पना शीलता व घरानेदार अभिव्यक्ति और परंपरा के निर्वाह के लिये राष्ट्रीय तानसेन सम्मान वर्ष 2017-18 से सादर विभूषित करता है।

 

 

 

 

 

आरंभ में अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलित कर इस वर्ष के तानसेन समारोह का विधिवत शुभारंभ किया। संचालक संस्कृति विभाग श्री अक्षय सिंह ने स्वागत उदबोधन दिया। उस्ताद अलाउद्दीन खाँ संगीत एवं कला अकादमी के निदेशक श्री पी के झा भी कार्यक्रम में मौजूद थे।

तानसेन ने विश्व भर में ग्वालियर की धरा को गौरवान्वित किया – श्रीमती माया सिंह


बेहट में संगीत महाविद्यालय और रूसा योजना में संगीत संस्थान होंगे शामिल – श्री पवैया
इस अवसर पर नगरीय विकास एवं आवास मंत्री श्रीमती माया सिंह ने कहा कि शास्त्रीय संगीत के अमर गायक तानसेन ने ग्वालियर की धरा पर जन्म लेकर विश्व पटल पर ग्वालियर के साथ-साथ पूरे प्रदेश को गौरवान्वित किया। उन्होंने कहा कि सुर सम्राट तानसेन की गायकी ग्वालियर की फिजा में आज भी समाई है। संगीत कलाकारों को उनकी रूह और गायकी की अज्ञात उपस्थिति का ग्वालियर में अभी भी आभास होता है। श्रीमती माया सिंह ने कहा कि भारतीय शास्त्रीय संगीत की अविरल धारा को अक्षुण्ण बनाए रखने में मूर्धन्य संगीत कलाकार पं. उल्हास कशालकर जैसी विभूतियाँ महती भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि पूरी साजो-सज्जा के साथ ग्वालियर शहर में तानसेन की प्रतिमायें एवं वीरांगना अवंतीबाई लोधी की प्रतिमा स्थापित कराई जायेंगी।

 

 

 

 

 

उच्च शिक्षा मंत्री श्री जयभान सिंह पवैया ने राष्ट्रीय तानसेन अलंकरण समारोह में अहम घोषणायें की। श्री पवैया ने कहा कि तानसेन की जन्मभूमि बेहट में राजा मानसिंह संगीत एवं कला विश्वविद्यालय के माध्यम से एक संगीत महाविद्यालय स्थापित किया जायेगा। इस संगीत संस्थान परिसर में सुर सम्राट तानसेन के नाम से एक गैलरी भी स्थापित की जायेगी। साथ ही यहाँ पर हर हफ्ते संगीत व कला पर केन्द्रित कार्यक्रम आयोजित किए जायेंगे। उन्होंने बताया संगीत संस्थान के लिये कलेक्टर ने जल्द ही जमीन आवंटित करने का भरोसा दिलाया है। उच्च शिक्षा मंत्री ने प्रदेश के सभी संगीत एवं कला महाविद्यालयों को रूसा योजना में शामिल करने की घोषणा भी इस मौके पर की। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार की इस योजना के तहत अभी तक केवल उच्च शिक्षा विभाग के संस्थानों में ही अधोसंरचना के लिये आर्थिक सहायता दी जाती थी। अब संगीत एवं कला संस्थानों को भी इस योजना का लाभ मिलेगा।

 

 

 

 

 

 

श्री पवैया ने इस मौके पर यह भी कहा कि मलगढ़ा चौराहे पर वीरांगना अवंतीबाई की प्रतिमा स्थापित होने पर उन्हें खुशी होगी। उन्होंने कहा अवंतीबाई चौराहे के विकास के लिये वे अपनी विधायक निधि से 10 लाख रूपए की राशि मुहैया करायेंगे। साथ ही ग्वालियर शहर से जुड़े प्रमुख चौराहे पर संगीत सम्राट तानसेन की प्रतिमा भी स्थापित कराई जायेगी। उच्च शिक्षा मंत्री ने कहा कि सुविख्यात शास्त्रीय गायक पं. कशालकर को सम्मानित कर प्रदेश सरकार कृतार्थ हुई है। उन्होंने कहा सुर सम्राट तानसेन का संगीत मन को शांति और समुद्र जैसी स्निग्धता प्रदान करता है। जबकि पाश्चात संगीत मन में उथल-पुथल पैदा करता है।

ग्वालियर ख्याल गायकी की गंगोत्री है – पं. कशालकर  

राष्ट्रीय तानसेन अलंकरण से विभूषित पं. उल्हास कशालकर ने इस अवसर पर कहा कि ग्वालियर ख्यात गायकी की गंगोत्री है। ग्वालियर से हमारा गहरा नाता है। मुझे इस बात की बेहद खुशी है कि मुझे संगीत सम्राट तानसेन के नाम से सम्मानित अलंकरण मिला है। उन्होंने कहा संगीत व कला के संरक्षण के क्षेत्र में मध्यप्रदेश सरकार के प्रयास सराहनीय हैं। प्रदेश सरकार द्वारा इस क्षेत्र में कई बड़े-बड़े सम्मान दिए जाते हैं।

इन संस्थाओं को मिला राजा मानसिंह तोमर राष्ट्रीय सम्मान

भारतीय शास्त्रीय संगीत, कला एवं संस्कृति के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य कर रहीं 6 संस्थाओं को राष्ट्रीय राजा मानसिंह तोमर सम्मान से अलंकृत किया गया। वर्ष 2011-12 के लिये गुरू केलुचरण महापात्रा-ओडिसी नृत्यबासा, वर्ष 2012-13 के लिये त्रिवेणी कला संगम, वर्ष 2013-14 के लिये रंगश्री लिटिल बैले ग्रुप, वर्ष 2014-15 के लिये बॉम्बे आर्ट सोसायटी, वर्ष 2015-16 के लिये श्री इदगुंजी महागणपति यक्षगान मंडली, कनार्टक एवं वर्ष 2016-17 के राजा मानसिंह तोमर राष्ट्रीय सम्मान से सुश्री नांदीकर कोलकता को अलंकृत किया गया।


 

 

 

 

 

अलंकरण समारोह में वर्ष 2013 के राजा मानसिंह तोमर राष्ट्रीय सम्मान से विभूषित त्रिवेणी कला संगम ने सम्मान में मिली एक लाख रूपए की राशि भोपाल की दिव्यांग संस्था आरूषि को दान करने की घोषणा की। संस्था की प्रतिनिधि सुश्री किरन चौपड़ा ने इस आशय की घोषणा की। उन्होंने बताया कि उनकी संस्था जो भी सम्मान राशि मिलती है वह इसी प्रकार की संस्थाओं के कल्याण के लिये दान में देती आई है।

त्रिवेणी कला संगम ने सम्मान राशि दिवयांग संस्था को दान की

पं. कशालकर की घरानेदार गायिकी के माधुर्य में डूबे रसिक

मूर्धन्य गायक पं. उल्हास कशालकर ने जब अपनी खनकदार आवाज में राग केदार अपने गायन की शुरूआत की, तो ग्वालियर की घरानेदार गायिकी जीवंत हो उठी।  जाहिर है संगीत रसिक घरानेदार गायिकी के माधुर्य में गोते लगाते नजर आए। बंदिश के बोल थे “जोगी रावला सुनाई”। इसके बाद उन्होंने द्रुत एक ताल में निबद्ध रचना “सुघर चतुर बईंयाँ” प्रस्तुत कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। उन्होंने राग तिलंग में गायन के साथ अपनी गायकी का समापन किया। उनके साथ सारंगी पर जनाब सरबर हुसैन और तबला पर श्री रोहित मजूमदार से संगत की। सह गायक की भूमिका श्री निर्भय सक्सेना और डॉ. ओजेस प्रताप सिंह ने निभाई।

 

 

 

 

 

 

 

पं. कशालकर के बाद विख्यात सितार वादक श्री शुभेन्द्र राव दिल्ली की प्रस्तुति हुई। उन्होंने अपने सितार वादन से समा बांध दिया। अंतिम कलाकार के रूप में भोपाल के श्री संजीव झा एवं श्री मनीष कुमार की ध्रुपद जुगलबंदी ने पूरे माहौल को संगीतमय बना दिया।

माधव संगीत महाविद्यालय के ध्रुपद गायन से हुई पहली सभा की शुरुआत

इस साल के तानसेन समारोह की पहली संगीत सभा का आगाज शासकीय माधव संगीत महाविद्यालय ग्वालियर द्वारा प्रस्तुत ध्रुपद गायन से हुआ। श्रीमती वीणा जोशी के निर्देशन में तानसेन प्रशस्ति “ध्रुव कंठ स्वरोग्राह” के साथ गायन की शुरूआत की। इसके बाद राग विहाग एवं ताल-चौताल में निबद्ध ध्रुपद रचना “महादेव देवन पति” की प्रस्तुति हुई। ध्रुपद गायन में सारंगी पर जनाब अली अहमद खाँ और पखावज पर श्री यमुनेश नागर ने संगत की।

“तानसेन समारोह” में आज इनकी प्रस्तुति

प्रात:कालीन सभा

श्री योहानेस मॉलर स्वीडन गिटार वादन (विश्व संगीत), श्री धनंजय हेंगड़े मुम्बई गायन, श्री सचिन मनोहर पटवरधन इंदौर स्पैनिश वीणा और जनाब मुन्ने खाँ, जनाब शफीक हुसैन व जनाब आबिद हुसैन भोपाल की सारंगी तिगलबंदी। इस सभा का शुभारंभ भारतीय संगीत महाविद्यालय ग्वालियर के ध्रुपद गायन से होगा।

 

सायंकालीन सभा

सुश्री डारलिनी सिंह कौल गायन, मैक्जम शेड्रोविटिस्की-ओद, बैन ऐरी डॉगोविच हाँग, फ्रांस (विश्व संगीत), श्री अनुज प्रताप सिंह ग्वालियर ध्रुपद गायन, सुश्री पूर्वी निमगांवकर इंदौर गायन, श्री अखिलेश गुंदेचा एवं साथी भोपाल पखावज वृंद और श्रीयुत श्रीनिवास जोशी पुणे गायन। इस सभा का आरंभ शंकरगंधर्व संगीत महाविद्यालय ग्वालियर के ध्रुपद गायन से होगा।

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