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मुर्गा दंगल में 10 करोड़ का दांव

छत्तीसगढ़ के मशहूर बस्तर दशहरा के समापन पर डिलमिली में शनिवार को दो दिनी वार्षिक बाजार में मुर्गों का दंगल शुरू हो गया। दो दिन में यहां 10 हजार मुर्गों के जोड़े पंजा लड़ाएंगे और 10 करोड़ तक का दांव लगेगा। मुर्गों की लड़ाई देखने और दांव लगाने के लिए शनिवार को हजारों लोग जमा हुए।

मान्यता है कि दशहरा के बाद मां दंतेश्वरी दंतेवाड़ा लौट आती हैं। दशहरा के बाद समापन पर मुर्गा बाजार लगता है। इसमें मुर्गों की लड़ाई होती है। मुर्गों की टांग के नीचे और पंजे से थोड़ा ऊपर काटी (छोटी छुरी) बंधी होती है। इसी से एक-दूसरे पर वार करते हैं। बुरी तरह घायल होने के बाद जब कोई मुर्गा लड़ने की स्थिति में नहीं रहता और मरणासन्ना हो जाता है, तब लड़ाई खत्म होती है।

 

बनाया जाता है दांव क्षेत्र : जिला मुख्यालय से 34 किमी दूर एनएच-63 पर स्थित डिलमिली में कई दशक से यह दंगल होता है। मुर्गा लड़ाने वाले से 50 रुपए प्रवेश शुल्क तो कुर्सी पर बैठकर दांव लगाने वालों से 100 रुपए लिए जाते हैं।

ऐसे लगाते हैं दांव : मुर्गा लड़ाने वाले पहले अपने मुर्गे के बराबर के वजन व कद वाला मुर्गा ढूंढ़ते हैं। फिर दोनों में दांव की राशि तय होती है। जैसे ही मुर्गे मैदान में लाए जाते हैं, घेरा बनाकर खड़े लोग हाथों में नोट लेकर दांव लगाते हैं।

 

 

पचास हजार तक के दांव : दंगल में छोटे मुर्गे पर 10 हजार तो बड़े पर 40 से 50 हजार रुपए तक के दांव लगते हैं। एक लड़ाई में औसतन 10 हजार रुपए के दांव के हिसाब से दो दिन में करीब 10 हजार जोड़ों पर 10 करोड़ रुपए तक के दांव लगने की संभावना है। शनिवार को भाजपा के पूर्व विधायक भीमा मंडावी, छत्तीसगढ़ वन विकास निगम के पूर्व अध्यक्ष समुंद साय कच्छ भी मुर्गा लड़ाने पहुंचे थे। व्यवस्थापक सरपंच आयतूराम मंडावी ने बताया कि शनिवार दोपहर 1 से शाम पौने 5 बजे तक करीब दो हजार मुर्गों की लड़ाई हो चुकी थी। रविवार सुबह 6 बजे से लड़ाई फिर शुरू होगी।

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