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दार्जिलिंग में 6 दिन से बंद, जरूरी चीजों के लिए परेशान लोग

कोलकाता.पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग में अगल राज्य (गोरखालैंड) की मांग को लेकर 12 दिन से आंदोलन जारी है। पिछले दिनों कई जगहों पर हिंसा और आगजनी हो चुकी है। मंगलवार को लगातार छठे दिन यहां बाजार बंद रहे। गोरखा जन मुक्ति मोर्चा के बेमियादी बंद और कर्फ्यू की चलते टूरिस्ट और आम लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। हजारों टूरिस्ट फंसे हुए हैं और लोग राशन और दूध जैसी जरूरी चीजों की किल्लत से जूझ रहे हैं। इसबीच, जीजेएम ने ऑल पार्टी मीटिंग बुलाई है। इसमें लोकल लेवल की कई पार्टियों के शामिल होने की उम्मीद है। माना जा रहा है कि इसमें आगे के लिए आंदोलन की स्ट्रैटजी पर चर्चा हो सकती है। उधर, आंदोलन को बड़ी साजिश बताने के बाद सीएम ममला बनर्जी सोमवार को नीदरलैंड रवाना हो गईं।

 

– दार्जिलिंग में हालात काबू करने के लिए सिक्युरिटी फोर्सेस की गश्त जारी है। अफवाहें न फैलें इसलिए इलाके में 3 दिन से इंटरनेट सर्विस बंद है। मेडिकल स्टोर को छोड़कर सभी दुकानें बंद हैं।
– शनिवार को दार्जिलिंग में जीजेएम का आंदोलन हिंसक हो गया था। कई जगहों पर पुलिस-सिक्युरिटी फोर्सेस की प्रदर्शनकारियों से झड़प हुई। पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा। आंसू गैस के गोले भी छोड़े गए थे। हिंसा में अब तक 4 लोगों की मौत हो चुकी है। रविवार को सैंकड़ों जीजेएम सपोर्टर्स ने हिंसा में मारे गए शख्स के शव के साथ रैली निकाली।
– इसबीच, जीजेएम के प्रेसिडेंट बिमल गुरंग ने कहा, ”गोरखा आंदोलन को उग्रवादी संगठनों के सपोर्ट के बारे में सीएम ममता बनर्जी सफेद झूठ बोल रही हैं। वह लोगों को गुमराह कर रही हैं। यह राजनीतिक लड़ाई नहीं, बल्कि अस्मिता का संघर्ष है। अलग गोरखालैंड बनने तक हम चुप नहीं बैठेंगे।”
हिंसा के चलते टूरिस्टों ने सिक्किम का रूख किया
– जीजेएम के आंदोलन का सबसे ज्यादा असर दार्जिलिंग के टूरिज्म पर पड़ा है। खास बात ये है कि दार्जिलंग में टूरिज्म ही सबसे बड़ा बिजनेस सेक्टर है। यहां आने वाले टूरिस्ट्स की तादाद करीब 90 फीसदी कम हो गई है। दार्जिलिंग को क्वीन ऑफ हिल्स या पहाड़ों की रानी भी कहा जाता है।

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